इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष की याचिका खारिज कर दी, जिसमें मस्जिद को ‘विवादित ढांचा’ घोषित करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल तथ्यों के आधार पर मस्जिद को विवादित नहीं माना जा सकता। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद जन्मस्थान पर बनी है। यह मामला जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन से जुड़ा है। अदालत में कुल 18 याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। यह फैसला मुसलमान पक्ष के लिए राहत भरा है, लेकिन भूमि विवाद पर आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राम मनोहर मिश्रा की एकल पीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए शाही ईदगाह को विवादित परिसर मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर इसे फिलहाल विवादित ढांचा घोषित करना संभव नहीं है।
हिंदू पक्ष की ओर से महेंद्र प्रताप सिंह ने 5 मार्च 2025 को याचिका दाखिल कर ईदगाह को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग की थी। इस पर 23 मई को सुनवाई पूरी हुई थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
हिंदू पक्ष ने क्या दावा किया?
महेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत में दलील दी कि ईदगाह का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को तोड़कर किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों और विदेशी यात्रियों के विवरण का हवाला देते हुए कहा कि किसी रिकॉर्ड में वहां मस्जिद दर्ज नहीं है।
सिंह के मुताबिक न तो खसरा-खतौनी में ईदगाह का नाम है, न ही नगर निगम के रिकॉर्ड में। उन्होंने आरोप लगाया कि ईदगाह प्रबंधन बिजली चोरी जैसे मामलों में भी लिप्त रहा है। हिंदू पक्ष ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा माना गया, वैसे ही शाही ईदगाह को भी घोषित किया जाए।हिंदू पक्ष की सभी दलीलों का अन्य पक्षकारों ने समर्थन किया, लेकिन मस्जिद पक्ष ने इस मांग का कड़ा विरोध किया।
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