खबर संसार नई दिल्ली। भारत को 25 सालों में विकसित देश बनाना है। जी हा 82 मिनट लम्बे भाषण में पीएम मोदी ने तमाम विषयो को छुआ।उनपर विस्तार से बाते की लाल किले की प्राचीर से। और कहा यह से कही हर बात का अपना महत्व है। बताते चले कि पीएम मोदी 9 वी बार लालकिले की प्राचीर देश को संबोधित कर रहे थे।
मोदी बोले भारत को 25 सालों में विकसित देश बनाना है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 76वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देशवासियों के सामने अगले 25 साल का ब्लूप्रिंट रखा। उन्होंने साफ कर दिया कि इन वर्षों में भारत को विकसित देश बनाना होगा। यह तभी कामयाब होगा जब हम ‘पंच प्रण’ लेंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर कड़े प्रहार भी किए। आह्वान किया कि इनसे अब निर्णायक लड़ाई करनी होगी।
संकल्प सिद्धि का खाका:लाल किले की प्राचीर पर लगातार नौवीं बार तिरंगा फहराने के बाद मोदी ने कहा कि यहां से कही गई बात का अपना महत्व होता है, इसलिए यहां से शुरू की गई लड़ाई अपने लक्ष्य तक पहुंचेगी। आजादी के अमृतकाल के स्वाधीनता दिवस पर मोदी ने 82 मिनट के भाषण में नए कार्यक्रम या लोकलुभावन घोषणा नहीं की पर भविष्य के भारत के संकल्प एवं उसकी सिद्धि का खाका जरूर खींचा।
कम मंजूर नहीं:प्रधानमंत्री ने अगले 25 वर्ष की यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण बताया। कहा, इस दौरान हमें इन ‘पंच प्रण’ पर अपनी शक्ति को केंद्रित करना होगा ताकि 2047 में जब स्वतंत्रता के सौ साल पूरे हों तब हम आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरे करने वाला भारत बनाकर दिखाएं। इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं होना चाहिए।
राजनीतिक शुद्धिकरण: मोदी ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भ्रष्टाचार,भाई भतीजावाद, परिवारवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। राजनीति के शुद्धिकरण के लिए यह बेहद अहम है। हालांकि,उन्होंने किसी दल या नेता का नाम नहीं लिया।
लोग इंतजार नहीं करना चाहते: प्रधानमंत्री ने कहा, आज हर नागरिक प्रगति अपनी आंखों से देखना चाहता है, चीजों को बदलना चाहता है लेकिन वह इंतजार करने को तैयार नहीं है। हमें गर्व है कि आज हिंदुस्तान के हर कोने, हर समाज, हर वर्ग एवं हर तबके में आकांक्षाएं उफान पर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को इसके कारण संकट हो सकता है क्योंकि जब समाज आकांक्षी होता है तब सरकारों को भी तलवार की धार पर चलना पड़ता है। उन्हें भी समय के साथ दौड़ना पड़ता है, पर मुझे विश्वास है कि चाहे केंद्र हो या राज्य सरकार या फिर किसी प्रकार की शासन व्यवस्था क्यों न हो, हर किसी को इस समाज की आकांक्षाओं का पूरा करना पड़ेगा।


