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आसान नहीं SP-BSP और कांग्रेस के लिए ब्राह्मण प्रेम…

खबर संसार, लखनऊ : आसान नहीं SP-BSP और कांग्रेस के लिए ब्राह्मण प्रेम…, जैसा कि देखा जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव 2022 उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा कांग्रेस सहित अन्य पार्टियां भी ब्राह्मणों को लुभाने का कार्य कर रही हैं। जिसमें बहुजन समाज पार्टी (BSP) ब्राह्मणों को लुभाने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने के लिए बसपा ने जगह-जगह सम्मेलन करके अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

BSP कर रही ब्राह्मण सम्मेलन

लखनऊ में BSP अध्यक्ष मायावती ने प्रबुद्ध सम्मेलन में ब्राह्मणों को लुभाने के लिए वादा किया कि यदि प्रदेश में BSP की सरकार बनती है तो उनका ध्यान रखा जाएगा। बता दें कि 2007 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए ब्राह्मणों का समर्थन 40 प्रतिशत तक कम हो गया गया था। जिसके चलते मायावती ने बहुमत हासिल किया था।

सपा भी कर रही ब्राह्मण सम्मेलन

BSP के साथ-साथ SP अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी 22 अगस्त से जिला स्तरीय ब्राह्मण सम्मेलन के कर ब्राह्मणों तक पहुंचने शुरूआत की है। अखिलेश बड़े ब्राह्मण नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी मंथन करते नजर आ रहे है। जैसा कि सबको पता है कि प्रदेश की राजनीति पहले ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोट बैंक पर पार्टियों की नजर ज्यादा हुआ करती थी, लेकिन ऐसा पहली बार लग रहा है कि लग रहा है, 2022 विस के चुनाव केंद्र में ब्राह्मण है।

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क्या ब्राह्मणों की चुनाव में भूमिका

आखिर क्या वजह है कि उत्तर प्रदेश में पार्टियां इस वोट बैंक पर इतना ध्यान दे रही हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार जाटवों के बाद ब्राह्मण दूसरे स्थान पर आते हैं। जिनकी आबादी 10 प्रतिशत है। जो पूरे प्रदेश की राजनीति मे प्रभाव डाल सकता है। यही वजह है सभी राजनीतिक दल ब्राह्मण वोट के लिए सम्मेलन करने में लगे हुए हैं।

राज्य में ब्राह्मण प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। वोट के लिए कांग्रेस भी मंदिर-मंदिर जा रही है। एनडी तिवारी, जो 1989 में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थे, वे भी ब्राह्मण थे। हालांकि, मंदिर की राजनीति के बाद से ब्राह्मणों को भाजपा के समर्थक के तौर पर माना जाता है जो बड़े पैमाने पर भाजपा को ही वोट देते रहे हैं।

ब्राह्मण और भाजपा का प्रेम 

श् मंडल और मंदिर की राजनीति से पहले ब्राह्मण यूपी में कांग्रेस के प्रति वफादार थे। जैसे-जैसे रामजन्मभूमि आंदोलन ने गति पकड़ी, तो कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई। सूबे में 1993 से लेकर 2004 तक, जब किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, ब्राह्मणों ने भाजपा का पूरा समर्थन किया, चाहे वह विधानसभा चुनाव हो या संसदीय चुनाव। इधर 2014 से लेकर अब तक भाजपा के प्रति ब्राह्मणों झुकाव जबरदस्त तरीके से बढ़ा है। और वह लगातार भाजपा को ही वोट दे रहे हैं।

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