भारत की समय प्रणाली में एक बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार देश की डिजिटल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एक सटीक और समान समय प्रणाली से जोड़ने की तैयारी में है। इसके तहत ‘वन नेशन वन टाइम’ पहल को लागू किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए ‘लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026’ लागू करने की योजना तैयार की है, जिसके मार्च 2027 से पूरी तरह प्रभावी होने की बात कही जा रही है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग डिजिटल सर्वर, सरकारी सिस्टम और वित्तीय संस्थानों के समय में मौजूद मामूली अंतर को खत्म करना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आम लोगों को अपनी घड़ी या मोबाइल का समय बदलना पड़ेगा।
आपकी घड़ी और स्मार्टफोन पर क्या होगा असर?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम नागरिकों को अपनी कलाई घड़ी, दीवार घड़ी या स्मार्टफोन में किसी तरह का बदलाव नहीं करना होगा। देश में पहले की तरह भारतीय मानक समय यानी IST ही लागू रहेगा।
बदलाव मुख्य रूप से उन डिजिटल प्रणालियों और बैकएंड सर्वरों में होगा, जिन पर बैंकिंग, वित्तीय लेनदेन, सरकारी सेवाएं और दूसरी डिजिटल सुविधाएं निर्भर करती हैं।
आज के डिजिटल दौर में समय की बेहद सटीकता महत्वपूर्ण हो गई है। वित्तीय लेनदेन, शेयर बाजार, रेलवे टिकट बुकिंग और एयरलाइन सिस्टम जैसी सेवाओं में सर्वरों के समय में अंतर से तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे सिस्टम को एक समान और अधिक सटीक समय संदर्भ से जोड़ना है।
इसके लिए देश में इस्तेमाल होने वाले कानूनी, वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी सिस्टम को भारतीय मानक समय के अधिक सटीक राष्ट्रीय संदर्भ से सिंक्रोनाइज करने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसमें दिल्ली स्थित नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) की अत्यंत सटीक समय प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
क्या है One Nation One Time?
‘वन नेशन वन टाइम’ का मूल विचार यह है कि देश की अलग-अलग डिजिटल और प्रशासनिक प्रणालियां एक ही आधिकारिक और सटीक समय संदर्भ का इस्तेमाल करें।
मान लीजिए किसी डिजिटल सिस्टम और बैंक के सर्वर के समय में कुछ सेकंड का अंतर है। सामान्य परिस्थितियों में यह अंतर नजर नहीं आता, लेकिन हाई-स्पीड डिजिटल लेनदेन में यही छोटा अंतर तकनीकी गड़बड़ी का कारण बन सकता है। एक समान टाइम सिंक्रोनाइजेशन से ऐसे सिस्टम के बीच समय का अंतर कम करने में मदद मिलेगी।
आखिर समय तय कैसे होता है?
समय की गणना को समझने के लिए पृथ्वी के घूमने को समझना जरूरी है। पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर घूमती है और लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है।
पृथ्वी को समझने के लिए मानचित्र पर 360 डिग्री देशांतर रेखाओं की कल्पना की गई है। 24 घंटे में 360 डिग्री घूमने के आधार पर प्रत्येक 1 डिग्री देशांतर के लिए लगभग 4 मिनट का समय अंतर माना जाता है।
इसी गणित के अनुसार 15 डिग्री देशांतर के अंतर पर लगभग 1 घंटे का समय अंतर बनता है। पृथ्वी के पूर्वी हिस्सों में सूर्य पहले दिखाई देता है, इसलिए वहां दिन की शुरुआत पश्चिमी हिस्सों की तुलना में पहले होती है।
GMT से UTC तक कैसे पहुंची दुनिया?
19वीं सदी में रेलवे और टेलीग्राफ का विस्तार होने के साथ अलग-अलग शहरों के स्थानीय समय के कारण बड़ी समस्या पैदा होने लगी। इसे दूर करने के लिए 1884 में वाशिंगटन डीसी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन में लंदन की रॉयल ग्रीनविच ऑब्जर्वेटरी से गुजरने वाली देशांतर रेखा को 0 डिग्री मानकर वैश्विक समय संदर्भ तय किया गया। इसे ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) कहा गया।
बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि पृथ्वी के घूमने की गति पूरी तरह स्थिर नहीं रहती। अधिक सटीक समय निर्धारण के लिए परमाणु घड़ियों पर आधारित व्यवस्था विकसित हुई और आधुनिक समय प्रणाली में कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) प्रमुख संदर्भ बन गया।
परमाणु घड़ियां परमाणुओं के बेहद स्थिर आवृत्ति व्यवहार पर आधारित होती हैं। सीजियम-133 परमाणु का इस्तेमाल समय की अंतरराष्ट्रीय परिभाषा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्या है भारतीय मानक समय यानी IST?
भारत का आधिकारिक समय Indian Standard Time (IST) कहलाता है। इसे 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर के आधार पर निर्धारित किया गया है। यह देशांतर रेखा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर क्षेत्र से होकर गुजरती है। भारतीय मानक समय UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। यानी जब UTC के अनुसार दोपहर 12 बजे होते हैं, तब भारत में शाम के 5:30 बज रहे होते हैं।
भारत में एक ही टाइम जोन क्यों है?
भारत का भौगोलिक विस्तार पूर्व से पश्चिम तक करीब 2,900 किलोमीटर है। देश लगभग 68° पूर्वी देशांतर से 97° पूर्वी देशांतर तक फैला है।
इसका अर्थ है कि देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में प्राकृतिक सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में काफी अंतर होता है। लगभग 30 डिग्री देशांतर का अंतर होने के कारण स्थानीय सौर समय में करीब 2 घंटे का अंतर हो सकता है।
अगर देश में अलग-अलग आधिकारिक समय क्षेत्र होते, तो रेलवे, विमानन, बैंकिंग, सरकारी कामकाज और दूसरे राष्ट्रीय स्तर के सिस्टम में समन्वय अधिक जटिल हो सकता था। इसी वजह से भारत ने पूरे देश के लिए एक ही आधिकारिक समय यानी IST को अपनाया हुआ है।
भारत में IST का इतिहास
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग स्थानीय समय प्रचलित थे। बॉम्बे टाइम, कलकत्ता टाइम और मद्रास टाइम जैसे क्षेत्रीय समय इस्तेमाल किए जाते थे। रेलवे के विस्तार के साथ अलग-अलग समय प्रणालियों के कारण परिचालन संबंधी समस्याएं भी सामने आईं।
आजादी के बाद भारत ने पूरे देश के लिए भारतीय मानक समय को अपनाया। धीरे-धीरे अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में प्रचलित स्थानीय समय समाप्त हो गए और देश एक ही राष्ट्रीय समय प्रणाली के तहत आ गया।
क्या भारत में दो टाइम जोन हो सकते हैं?
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सूर्योदय देश के पश्चिमी हिस्सों की तुलना में काफी पहले होता है। वहां सुबह जल्दी उजाला हो जाता है और शाम भी अपेक्षाकृत जल्दी हो जाती है।
इसी वजह से पूर्वोत्तर भारत में अलग टाइम जोन की मांग लंबे समय से उठती रही है। असम के चाय बागानों में अनौपचारिक रूप से ‘चाय बागान टाइम’ का इस्तेमाल भी किया जाता है, जो IST से लगभग एक घंटा आगे माना जाता है।
हालांकि, देश में दो आधिकारिक टाइम जोन लागू करने को लेकर प्रशासनिक समन्वय, रेलवे संचालन और सुरक्षा जैसी चुनौतियों की चिंता जताई जाती रही है। यही वजह है कि भारत फिलहाल एक ही आधिकारिक समय प्रणाली यानी IST को बनाए हुए है।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात
One Nation One Time का मतलब आपकी घड़ी का समय बदलना नहीं है। आपकी घड़ी, मोबाइल और रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाला समय IST के अनुसार ही रहेगा।
इस पहल का असली बदलाव डिजिटल दुनिया के बैकएंड में होगा, जहां बैंकिंग, वित्तीय लेनदेन, सरकारी सेवाओं और दूसरे महत्वपूर्ण सिस्टम को अधिक सटीक और एक समान समय संदर्भ के साथ सिंक्रोनाइज करने की कोशिश की जाएगी।
मार्च 2027 से प्रस्तावित नई व्यवस्था के लागू होने के बाद इसका सबसे बड़ा असर आम नागरिक की घड़ी पर नहीं, बल्कि उन डिजिटल सिस्टम पर दिखाई देगा जो हर दिन करोड़ों लोगों की गतिविधियों को समय के हिसाब से संचालित करते हैं।
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