खबर संसार नई दिल्ली। गैर गतिविधि कानून के तहत पीएफआई भारत में बैन!केंद्र ने माना ये खास वर्ग के बीच फैला रहे कट्टरता।जी हा सरकार की ओर से कहा गया है कि पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन सार्वजनिक रूप से तो सामाजिक,आर्थिक और राजनेतिक रूप से कार्य करते है। लेकिन किसी खास एजेंडे के तहत समाज के एक वर्ग विशेष के कट्टरता फैला लोकतंत्र की अवधारणा को कमजोर करने की कोशिश करते है। दूसरी और कुछ अन्य संगठनों ने इस तरह पाबंदी लगाने को अलोकतांत्रिक कहा है।
गैर गतिविधि कानून के तहत पीएफआई भारत में बैन!केंद्र ने माना ये खास वर्ग के बीच फैला रहे कट्टरता
पीएफ आई पर बैन लगते ही इनकी सहयोगी रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पॉवर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन (केरल) पर केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगाया है।
बताते चले केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3 की उप-धारा (1) के तहत पीएफआई को प्रतिबंधित किया है। साथ ही राज्यों को इन पर कार्रवाई का अधिकार दे दिया है। इनसे जुड़े लोगों की तुरंत गिरफ्तारी और संपत्तियां जब्त हो सकती है। दूसरी और पीएफआई केरल प्रदेश महासचिव अब्दुल सत्तार ने कहा कि इस संगठन को भंग कर दिया गया है। हमारे महान देश के कानून का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में संगठन निर्णय को स्वीकार करता है। दूसरी और इसी संगठन के छात्र विंग ने इस मामले को कोर्ट में देख लेने की बात कही है।
सरकार के इस कदम से अधिसूचना के बाद संगठन की समस्त संपत्तियां जब्त होंगी। बैंक खातों पर रोक लगेगी। सामान्य गतिविधि पर भी पाबंदी रहेंगी।अधिसूचना जारी होने के 30 दिन के भीतर यूएपीए ट्रिब्यूनल का रुख करेंगी। गिरफ्तार पीएफआई के सदस्यों के खिलाफ कानूनी एजेंसियों की जांच जारी रहेगी।सरकार की पाबंदी से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति आदेश की तामील की तारीख से 14 दिनों के भीतर जिला जज की अदालत जा सकेगा। जिला जज इस पर फैसला करेंगे।
गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना में पीएफआई को गैर कानूनी संघ घोषित कर दिया गया। यानी पीएफआई किसी भी गतिविधि को अंजाम नहीं दे सकेगा। ना तो उसका कोई दफ्तर होगा और ना सदस्यता अभियान चला सकेगा। फंड लेने पर भी रोक रहेगी। संगठन या इसके सदस्यों ने इसका उल्लंघन किया तो कठोर कार्रवाई होगी।
हालाकि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानि पीएफआई खुद को एक नव-सामाजिक आंदोलन के रूप में वर्णित करता है जो लोगों को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ।







