FSSAI ने स्कूली बच्चों के खाने को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें पहली बार हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थों के लिए तय सीमाएं प्रस्तावित की गई हैं।
कैंटीन के खाने में अब तय पैमाने से होगी पहचान
FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, ठोस खाने में 100 ग्राम पर 3 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी होने पर उसे ‘हाई शुगर’ माना जाएगा। 4.2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त फैट होने पर ‘हाई फैट’ और 0.625 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर ‘हाई सॉल्ट’ की श्रेणी होगी।
ड्रिंक्स के लिए भी तय की गई अलग सीमा
बच्चों की पसंद वाली ड्रिंक्स के लिए 100 मिलीलीटर में 2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी, 1.5 ग्राम से ज्यादा फैट और 0.175 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर संबंधित हाई कैटेगरी में रखने का प्रस्ताव है। स्कूलों में बिकने वाले खाने की जांच इन्हीं नंबर्स के आधार पर की जा सकेगी।
बच्चों के बढ़ते वजन और मोटापे की भी चिंता
World Obesity Atlas 2026 के मुताबिक, भारत में करीब 4.1 करोड़ बच्चे ज्यादा वजन या मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं। जुलाई में ICMR के राष्ट्रीय पोषण संस्थान की अगुवाई वाली ‘Let’s Fix Our Food’ पहल में भी स्कूलों में मिलने वाले खाने, विज्ञापन, लेबलिंग और टैक्स से जुड़े नियमों को मजबूत करने की जरूरत बताई गई थी।
अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम
FSSAI का यह अभी सिर्फ ड्राफ्ट है। राजपत्र में प्रकाशन के बाद आपत्ति और सुझाव के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। महाराष्ट्र में पिछले महीने स्कूलों के अंदर और 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाने की बिक्री, मुफ्त वितरण और विज्ञापन पर रोक का आदेश जारी किया गया था। यह आदेश करीब 1.08 लाख स्कूलों पर लागू होता है। स्कूल कैंटीन के लिए FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन भी जरूरी किया गया है।
ड्राफ्ट में ज्यादा सोडियम और नमक को लेकर तकनीकी सवाल भी है। वहीं, पैकेट वाले खाने की लेबलिंग का मामला सुप्रीम कोर्ट में अलग से चल रहा है। FSSAI ने 3 अगस्त को हलफनामा दाखिल कर पैकेट पर चेतावनी वाले निशान की जगह न्यूट्रिशन टेबल देने की बात कही है।
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