भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा में पेश किए गए नए संशोधन विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने जैसी गतिविधियों को कानून के दायरे में लाना है।
राज्यसभा में पेश हुआ नया संशोधन विधेयक
शुक्रवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ में संशोधन कर ‘वंदे मातरम’ को भी कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, राष्ट्रीय गीत को वही कानूनी दर्जा देने की योजना है जो वर्तमान में अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों को प्राप्त है।
वंदे मातरम के अपमान को बनाया जाएगा दंडनीय
इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने, उसके गायन में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करने या ऐसे किसी भी व्यवहार को कानूनी रूप से दंडनीय बनाना है जिसे राष्ट्रीय गीत का अपमान माना जाए। हालांकि, विधेयक में “अपमान” की सटीक परिभाषा क्या होगी, यह कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
1971 के कानून में होगा विस्तार
वर्तमान में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, भारतीय संविधान और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान से संबंधित मामलों में कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। नए संशोधन के जरिए इसी कानूनी व्यवस्था का विस्तार करते हुए ‘वंदे मातरम’ को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे राष्ट्रीय गीत को भी समान कानूनी संरक्षण मिल सके।
150वीं वर्षगांठ के बीच आया प्रस्ताव
यह संशोधन ऐसे समय में पेश किया गया है जब ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे पहले भी केंद्र सरकार सरकारी आयोजनों में इस गीत को अधिक महत्व देने की दिशा में कदम उठा चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले उन सरकारी कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, जहां राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ ‘वंदे मातरम’ भी गाया या बजाया जाता है।
आजादी की लड़ाई में रहा ऐतिहासिक महत्व
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित और उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल ‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनजागरण और राष्ट्रीय एकता का प्रमुख प्रतीक बना था। यही कारण है कि इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है और इसका ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व आज भी बना हुआ है।
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