Friday, January 21, 2022
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प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi की वे आदते जो शायद आप नहीं जानते?

खबर संसार, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi की वे आदते जो शायद आप नहीं जानते?, आज रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल के आखिरी महीने में ‘मन की बात’ में देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमे आमिक्रोन वेरियंट से हमें बचकर रहना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जो भारत के कई लोगों के दिलों पर राज करते हैं। उन्होंने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। वह एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे। तो आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास अंश- कि वह वह कौन हैं? कैसे हैं? उनकी आदतें क्या हैं?

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अनुशासनप्रिय है प्रधानमंत्री Modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र Modi इनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था। एक ज्योतिषी ने इनकी कुंडली देखकर कहा था कि राजनीति में इनकी अच्छी पकड़ रहेगी। इनकी माँ का नाम हीरा बेन है। इनके चार भाई और बहन हैं। इनकी पत्नी का नाम जसोदा बेन है, शादी के तुरंत बाद दोनों अलग हो गए थे। उनकी कामयाबी में अनुशासन का बड़ा योगदान है।

प्रधानमंत्री का साफ-सुथरा रहन-सहन

प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत आदत में स्वच्छ, शिकन मुक्त कपड़े पहनना है। ये आदत इनमें किशोरावस्था से है। वह साफ-सुथरे वस्त्र सज्जा पर ध्यान देते हैं। उनके पास अनेक कुर्ते हैं जो अहमदाबाद के उनके मनपंसद दर्जी द्वारा सिले गए हैं। इन्हें कलाई घड़ियों और सैंडिलों का शौक है। वह अपने आस-पास हर वस्तु स्वच्छ रखते हैं।

प्रधानमंत्री का स्वास्थ्य

प्रधानमंत्री का वजन लगभग 84 किलो है। उनकी रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से में समस्या होने की वजह से कई बार उनको पीठ में दर्द होता है, और लंबे समय तक खड़े रहने के कारण पैरों में सूजन आ जाती है। लेकिन यह सब उनके लिए सामान्य स्वास्थ्य समस्याएँ हैं। इनके अतिरिक्त Modi को स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या नहीं है। उनकी दिन की शुरूआत योग से होती है।

प्रधानमंत्री की कार्यशैली-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वह केवल पाँच घंटे ही सोते हैं, वह योग करना नहीं भूलते। पूरे भारत के लिए सुबह 7 बजे से ऑन लाइन रहते हैं। वह सुबह जल्दी कार्यालय जाते हैं और आवश्यकता होने पर रात्रि 10 बजे तक कार्य करते हैं। वह एक ऐसे नेता हैं जो राष्ट्रीय लोकतंत्र सरकार के प्रधानमंत्री बन कर भी राजनीति में अपनी पकड़ ढीली न पड़ने देने के सभी प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए भले ही उन्हें कोई भी और कितना भी कार्य करना पड़े, वह पीछे नहीं हटते। प्रधानमंत्री स्थानीयता को काफी महत्व देते हैं। हर बार उनके भाषणों में यह दिख चुका है। वो जिस भी प्रांत या क्षेत्र में जाते हैं वहां की भाषा और संस्कृति के जरिए आसानी से तालमेल बिठा लेते हैं।

व्रत-त्योहार-

वह हर साल नवरात्र के दौरान पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं। इस समय वह एक दिन में केवल एक फल खाते हैं। वह नवरात्र पर विशेष भोजन से परहेज करते हैं, जिसे पारंपरिक रूप से दिन में एक बार किया जाता है। वह देवी अंबा की भक्ति के लिए उपवास करते हैं। माँ अंबा की भक्ति के प्रति श्रद्धा के कारण उन्होंने गब्बर पहाड़ी पर 70 करोड़ रूपए से अधिक धनराशि की शक्तिपीठ परिक्रमा का निर्माण किया है। जो भक्तों के लिए एक पवित्र स्थान है।

आर.एस.एस. केप्रचारक

प्रधानमंत्री मोदी ने बाल स्वयं-सेवक के रूप में 8 साल की उम्र में आर.एस.एस. से निष्ठा की शपथ ली। इनकी चाय की दुकान के पास से संघ के कई प्रचारक और स्वयं सेवक गुजरते थे। मोदी के स्वयं सेवक होने की जानकारी मिलने पर चाय की दुकान उनका अड्डा बन गई। इन्हें संघ के कार्यालय में रहने का न्योता मिला। जहाँ सुबह उठकर वह प्रचारक और कार्यकर्ताओं के लिए नाश्ता बनाकर शाखा जाते। लौटकर कार्यालय का झाडू-पोंछा करते, कपड़े धोते थे तथा अन्य कार्य करते थे। आपात काल के समय इन्होंने भूमिगत होकर कार्य किया। 1985 में आरक्षण विरोधी आंदोलन के समय संघ ने भाजपा के विभिन्न पदों पर अपने प्रचारकों की भरती की। 1987 में इन्हें गुजरात भाजपा का संगठन मंत्री बनाया गया।

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