सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान के सऊदी में सेना भेजने के फैसले के बीच हूतियों ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के तीन एयरपोर्ट भी निशाने पर रहे, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
पाकिस्तान की एंट्री के बावजूद हूतियों के हमले तेज
सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान ने सऊदी की मदद के लिए अपनी सेना भेजने का फैसला किया है। इसके बावजूद हूतियों के हमलों में कमी नहीं आई। रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने सऊदी अरब के तीन एयरपोर्ट को निशाना बनाया और ड्रोन तथा बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया।
सऊदी और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य सहयोग का असर नहीं
पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सऊदी में सेना भेजने के फैसले से हूतियों के हमले रुक सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हूतियों के पास यमन से ड्रोन और मिसाइल हमले करने की क्षमता तथा अलग कमांड स्ट्रक्चर है। पाकिस्तान की सऊदी सुरक्षा में भूमिका बढ़ने का यह अर्थ नहीं है कि उसकी सेना सीधे यमन में हूतियों के खिलाफ मोर्चा संभाल रही है।
यमन में हूतियों का करीब एक-तिहाई इलाके पर नियंत्रण
यमन में हूतियों का करीब एक-तिहाई क्षेत्र पर नियंत्रण बताया गया है, जहां देश की करीब 80 प्रतिशत आबादी रहती है। पिछले 48 घंटों में हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा किया है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है।
सऊदी सीमा और तेल मार्गों पर भी दबाव
नजरान और जिजान जैसे यमन सीमा से लगे इलाके पहले से हूतियों के निशाने पर रहे हैं। लाल सागर और तेल आपूर्ति मार्गों पर दबाव बनाना भी उनके लिए रणनीतिक हथियार माना जाता है। पश्चिमी देशों और सऊदी अरब का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण और फंडिंग मुहैया कराता है।
10 प्वाइंट में समझें पूरी खबर
- सऊदी अरब पर हूतियों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं।
- पाकिस्तान ने सऊदी में सेना भेजने का फैसला लिया है।
- पाकिस्तान की एंट्री के बावजूद हूतियों ने हमले जारी रखे।
- हूतियों ने सऊदी के तीन एयरपोर्ट को निशाना बनाया।
- हमलों में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ।
- हूतियों के पास यमन से हमले करने की क्षमता है।
- यमन के करीब एक-तिहाई इलाके पर हूतियों का नियंत्रण बताया गया है।
- इस क्षेत्र में यमन की करीब 80% आबादी रहती है।
- सऊदी यमन सरकार और ईरान हूतियों का समर्थन करता है।
- नजरान, जिजान, लाल सागर और तेल आपूर्ति मार्ग रणनीतिक रूप से अहम हैं।
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