Gold Market: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच सोने की कीमतों में एक बार फिर मामूली बढ़त दर्ज की गई है। निवेशकों का झुकाव एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि, पूरे महीने के आंकड़े इस तेजी की तस्वीर को पूरी तरह संतुलित नहीं करते।
मार्च में रिकॉर्ड गिरावट ने बढ़ाई चिंता
मंगलवार को सोने की कीमतों में करीब 3 से 4 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली। लेकिन अगर मार्च महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो सोना करीब 11 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है। यह गिरावट साल 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल है।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। इस संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। महंगाई बढ़ने से केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाता है, जिसका सीधा असर सोने की मांग पर पड़ता है।
तेल बाजार और रणनीतिक संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति होती है। हालांकि, क्षेत्र में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
अन्य धातुओं का हाल
सोने के साथ-साथ चांदी और प्लेटिनम जैसी कीमती धातुओं में भी इस महीने भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि मंगलवार को इनमें भी कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन कुल मिलाकर बाजार दबाव में बना हुआ है।
ब्याज दरों का दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो वैश्विक केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपना सकते हैं। इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ेगी, जो सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्प के लिए नकारात्मक संकेत है।
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