नई दिल्ली: सऊदी अरब की फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (SFDA) ने जन स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। सऊदी अरब ने भारत सहित कुल 40 देशों से कच्चे चिकन (पोल्ट्री मीट) और टेबल एग्स (खाने वाले अंडे) के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह कदम मुख्य रूप से एवियन इन्फ्लूएंजा यानी बर्ड फ्लू (H5N1) और न्यूकैसल डिजीज जैसे पशु रोगों के बढ़ते जोखिम को देखते हुए उठाया गया है।
प्रतिबंध का मुख्य कारण
सऊदी अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध एहतियाती कदम है। वैश्विक स्तर पर बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों को और सख्त किया गया है। भारतीय पोल्ट्री उत्पाद फिलहाल इन उच्च मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पा रहे हैं। हालांकि, प्रोसेस्ड पोल्ट्री उत्पादों को छूट दी गई है, बशर्ते वे वायरस नष्ट करने वाली हीट ट्रीटमेंट या अन्य स्वीकृत प्रक्रिया से गुजरे हों। SFDA ने कहा कि यह सूची समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य अपडेट के आधार पर संशोधित की जाती रहेगी।
प्रभावित देशों की सूची
पूर्ण प्रतिबंध वाली 40 देशों की सूची में भारत के अलावा चीन, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इंडोनेशिया, ईरान, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, जापान, नाइजीरिया और अफगानिस्तान जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। वहीं, 16 अन्य देशों (जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली) में केवल कुछ प्रभावित राज्यों या शहरों से आयात पर आंशिक रोक लगाई गई है।
भारतीय पोल्ट्री उद्योग पर असर
सऊदी अरब भारत के पोल्ट्री निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बाजार रहा है। इस अचानक प्रतिबंध से निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। जिन किसानों और फार्मर्स ने निर्यात पर निर्भर होकर उत्पादन बढ़ाया था, उन्हें अब वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। घरेलू बाजार में चिकन और अंडों की आपूर्ति बढ़ने से कीमतें गिर सकती हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात होगी, लेकिन उत्पादकों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। एक्सपोर्टर्स को अब नए बाजार तलाशने होंगे, हालांकि नई रणनीति और लॉजिस्टिक्स में समय लगेगा।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
यह फैसला वैश्विक पोल्ट्री ट्रेड की नाजुकता को उजागर करता है। एक छोटी सी स्वास्थ्य चेतावनी या बीमारी का प्रकोप पूरे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। कई अन्य देश भी ऐसे प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
भारतीय सरकार और पोल्ट्री एसोसिएशन को अब निर्यात मानकों में सुधार, बेहतर बायो-सिक्योरिटी और वैकल्पिक बाजारों की तलाश पर फोकस करना होगा। SFDA ने स्पष्ट किया है कि स्थिति सामान्य होने पर प्रतिबंध की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल, पोल्ट्री किसानों और निर्यातकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है।
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