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तो क्या अब भैस के आगे बीन बजाने से खुलेगा बजार?

खबर संसार किच्छा दिलीप अरोरा। तो क्या अब भैस के आगे बीन बजाने से खुलेगा बजार? जहाँ एक ओर पुरे प्रदेश मे व्यापारी और व्यापारियों के समूह बजार को खुलवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है।तो वही इसके लिए वह भिन्न भिन्न प्रकार के विरोध के तरीके अपना रहे है इसमें कभी डीएम तो कभी सीएम तो कही कही एसडीएम को भी ज्ञापन देते हुए दिखे है। व्यापारियों की लगातार सरकार से मांग रही है की सरकार छोटे छोटे व्यापारियों की और भी अपना ध्यान लेकर आये और उनकी आर्थिक स्थिति को देखे भी समझें भी की व्यापारी इस समय कितने परेशान है।और सरकार बजारों को नियमों के साथ जल्द से जल्द खुलवाए ऐसी मांग भी लगातार कर रहे है।

साथ ही वह यह भी कहते दिख रहे है की यदि सरकार पूर्ण रूप से बजार नहीं खुलवा सकती है तो कम से कम बजारों के खुलने के समय को और बढ़ाये ताकि व्यापारियों को कुछ तो राहत मिले। जिससे उनके सामने जो आर्थिक संकट उतपन्न हो रहा है उसमे कुछ सुधार हो सके।
यही नहीं ज्ञापन देने के अलावा व्यापारी सरकार को चेतावनी भी देते रहते है और आये दिन विरोध करने के नये नये तरीके ढूंढ कर विरोध कर रहे है।अभी हॉल ही मे व्यापारियों ने ताली और थाली बजाकर विरोध दर्ज कराया था तो आज किच्छा के देव भूमि व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों ओर व्यापारियों ने एक और ऐसा नया बजार बंद का विरोध करने का निकाला जो हास्यपद होने के साथ साथ चर्चाओ का भी मुद्दा बन गया। और जिसकी फोटो ओर वीडियो भी लोग खूब शेयर कर रहे है। दरअसल लगातार बजार खोलने की मांग करते करते व्यापारी थक गए और उनको ऐसा लग रहा है की सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है।सरकार तक अपने बात पहुंचाने के लिए आज इन व्यापारियों ने अनूठा तरीका ढूंढ निकाला ओर भैस के आगे बिन बजाकर विरोध प्रदर्शन किया।

व्यापारियों ने भैस और बिन के साथ नई मंडी से एसडीएम कार्यालय तक एक मार्च निकाला और नारेबाजी भी की जिसके बाद एसडीएम कार्यालय पर एक ज्ञापन सौपा।
इस पर व्यापरी नेता दुर्गेश गुप्ता और जगरूप सिंह गोल्डी ने बताया की जैसे भैस के आगे बिन बजाकर कुछ हाथ नहीं लगता भैस कभी नहीं नाचती है।उसी प्रकार की स्थिति मौजूदा भाजपा सरकार की है जिस पर व्यापारियों की मांग का कोई असर नहीं हो रहा है। बार बार विरोध कर रहे है ज्ञापन दे रहे है बावजूद इसके सरकार के कानो पर जूँ तक नहीं रेंग रही है। हमने आज यह तरीका ढूँढा है ताकि हो सकता है की इस बार बिन की आवाज सुन कर भैस नाचने लगे और सरकार हमारी बातो को मन ले।अगर सरकार बात नहीं मानेगी तो आगे भी इसका विरोध जारी रहेगा ओर जेल भरो आंदोलन भी होगा।

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