खबर संसार देहरादून। राज्य में मुख्यमंत्री की रस्साकसी हुई तेज, दिग्गज गबाना नही चाहते सुनहरा मौका! जी हा दिग्गजो के बयान साफ इसारा इस बात का कर रहे है कि वो सीएम की कुर्सी पर बैठने को लालायित है। और हो भी क्यों ना,इसी लिए तो राजनीति में आए है । नेताओ द्वारा ऑफ द रिकॉर्ड बोले जाना वाला सेंटेंस।
मुख्यमंत्री की रस्साकसी हुई तेज, दिग्गज गबाना नही चाहते सुनहरा मौका!
धन सिंह रावत उत्तराखंड में जो जीत हुई है वह मोदी जी की वजह से हुई है हम चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैसे जीते हैं इसलिए मुख्यमंत्री के रूप में जिसे भी चुना जाएगा वही सर्वमान्य होगा। हालाकि मैं मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं हूं। पार्टी के 47 विधायक जीत कर आए हैं जिसे भी मुख्यमंत्री बनाया जाएगा मैं उसके साथ हूं। इधर कोटद्वार विधायक रितु खंडूरी महिला वोटरों को जीत का आधार बताते हुए अपनी पैरवी कर रही है। तो मिथक तोड़ने वाले गदरपुर विधानसभा के अरविंद पांडे हाईकमान के निर्णय को स्वीकार करने को कहते हैं वह कहते हैं कि राज्य की जनता ने उत्तराखंड के विकास के लिए द्वारा भारतीय जनता पार्टी को राज्य की सत्ता सौंपी है भाजपा कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है या एक संगठन है और संगठन चुनाव लड़ने से लेकर अन्य सभी जिम्मेदारी तय करता है लिहाजा वह जो भी तय करेगा जिसका नाम तय करेगा सीएम के लिए वह सर्वमान्य होगा
लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव हार जाने की वजह से अब नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मंथन किया जा रहा है। प्रह्लाद जोशी और विजयवर्गीय सौंपेंगे रिपोर्ट: भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री को लेकर निर्णय में अभी वक्त लग सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अभी गुजरात के दौरे पर हैं।
उनके दिल्ली लौटने पर राज्य के चुनाव प्रभारी प्रह्लाद जोशी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय उन्हें राज्य के चुनाव परिणामों को लेकर रिपोर्ट देंगे। उसके बाद ही मुख्यमंत्री के नाम पर कोई निर्णय लिया जाएगा।सीएम के चयन में भाजपा नेतृत्व के सामने फिलहाल तीन विकल्प हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी का एक धड़ा मुख्यमंत्री धामी को ही दुबारा सीएम बनाने की वकालत कर रहा है। जबकि दूसरा विधायकों से मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी करने वालों की संख्या भी कम नहीं है।


