HomePoliticalबंगाल चुनाव में ‘सिंघम’ IPS अजय पाल की एंट्री, बढ़ा सियासी तापमान

बंगाल चुनाव में ‘सिंघम’ IPS अजय पाल की एंट्री, बढ़ा सियासी तापमान

पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल चुनावी माहौल में उस समय नया मोड़ आया, जब चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के चर्चित IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना में ऑब्जर्वर नियुक्त किया। उनकी तैनाती के साथ ही एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे कथित तौर पर सत्ताधारी दल के समर्थकों को सख्त चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इसके बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।


संवेदनशील क्षेत्र में तैनाती से बढ़ी हलचल

दक्षिण 24 परगना को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे संवेदनशील इलाके में अजय पाल शर्मा की नियुक्ति को रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उनकी सख्त छवि और कार्रवाई की शैली पहले से ही चर्चा में रही है।


डेंटिस्ट से IPS तक का सफर

पंजाब के लुधियाना में जन्मे अजय पाल शर्मा का करियर काफी दिलचस्प रहा है। IPS बनने से पहले वे डेंटिस्ट थे। परिवार के प्रोत्साहन पर उन्होंने 2008 में UPSC की तैयारी शुरू की और चयनित होकर पुलिस सेवा में शामिल हुए। उनके भाई भी IAS अधिकारी बने।


‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के तौर पर पहचान

उत्तर प्रदेश में तैनाती के दौरान शर्मा ने कई हाई-रिस्क ऑपरेशनों का नेतृत्व किया। शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर जैसे जिलों में काम करते हुए उन्होंने अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। इसी वजह से उन्हें ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की पहचान मिली। हालांकि, खुद शर्मा ने इस टैग को महज परिस्थितियों का परिणाम बताया है, न कि कोई विशेष उपलब्धि।


रामपुर घटना से मिली बड़ी पहचान

साल 2018 में रामपुर में एक जघन्य अपराध के आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान हुई मुठभेड़ ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। इस कार्रवाई के बाद उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया और बाद में प्रमोशन भी मिला।


नोएडा में सख्त कार्रवाई, भ्रष्टाचार पर चोट

नोएडा में तैनाती के दौरान उन्होंने पुलिस विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए। एक मामले में उन्होंने सादे कपड़ों में निरीक्षण कर एक सब-इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा और तत्काल निलंबित किया।


विवादों से भी जुड़ा नाम

अजय पाल शर्मा का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। कुछ मुठभेड़ों को लेकर सवाल उठे, वहीं भ्रष्टाचार और ‘कैश-फॉर-पोस्टिंग’ जैसे आरोप भी लगे। हालांकि, इन मामलों में कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर भी उनके कुछ वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।


वायरल वीडियो से बढ़ा राजनीतिक तनाव

बंगाल में तैनाती के बाद सामने आए वीडियो में शर्मा कथित तौर पर एक उम्मीदवार के समर्थकों को चेतावनी देते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर मतदाताओं को डराने की कोशिश हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस वीडियो के सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और चेतावनी दी कि “बंगाल, उत्तर प्रदेश नहीं है।”


सियासी घमासान तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने भी इस नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सत्ताधारी दल ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया है।


क्या असर पड़ेगा चुनाव पर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अजय पाल शर्मा की तैनाती से चुनावी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी बढ़ेगी। साथ ही, इससे संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक सख्ती देखने को मिल सकती है।


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