अक्सर कहा जाता है कि पशु-पक्षियों में छठी इंद्रिय होती है। उन्हें आने वाले खतरे या आसपास होने वाले बदलावों का आभास पहले ही हो जाता है। यही वजह है कि कई बार कुत्ते, बिल्ली या गाय का व्यवहार अचानक बदल जाता है। शास्त्रों और लोकमान्यताओं में भी पशुओं की गतिविधियों को भविष्य के संकेतों से जोड़कर देखा गया है। खासकर रात के समय पशुओं का रोना या बोलना लोगों को चिंता में डाल देता है। आइए जानते हैं इसके पीछे मानी जाने वाली प्रमुख मान्यताएं।
रात में कुत्ते का रोना क्या दर्शाता है?
रात के समय अचानक कुत्ते का रोना या जोर-जोर से आवाज निकालना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि यह किसी अशुभ घटना का संकेत हो सकता है। कई लोगों का अनुभव है कि रात में कुत्ते के लगातार रोने के बाद आसपास से कोई दुखद समाचार सुनने को मिलता है। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि कुत्ते प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, तूफान या अन्य बड़े बदलावों को पहले महसूस कर लेते हैं। ऐसे में उनके व्यवहार में बेचैनी और डर साफ दिखाई देता है।
Night में बिल्ली का रोना क्यों माना जाता है अशुभ?
अगर रात के समय बिल्ली किसी घर के दरवाजे के सामने आकर रोने लगे, तो इसे शुभ संकेत नहीं माना जाता। मान्यताओं के अनुसार, यह परिवार के किसी सदस्य पर आने वाली परेशानी या मानसिक तनाव की ओर इशारा करता है।
वहीं, अचानक किसी बिल्ली का चुपचाप बैठे रहना या असामान्य रूप से सोना भी छोटे-मोटे रोग या कमजोरी का संकेत माना गया है। हालांकि, यह भी सच है कि सर्दी, भूख या शारीरिक दर्द के कारण भी बिल्लियां ऐसा व्यवहार कर सकती हैं।
रात में गाय का बोलना क्या संकेत देता है?
आमतौर पर गाय रात के समय नहीं बोलती। इसलिए अगर रात में गाय की आवाज सुनाई दे, तो इसे असामान्य माना जाता है। मान्यता है कि यह आसपास के क्षेत्र में किसी समस्या या संकट के आने का संकेत हो सकता है।
गाय का रात में बोलना बहुत दुर्लभ होता है, क्योंकि उसकी आवाज अधिकतर सुबह के समय ही सुनने को मिलती है।
मान्यता और वास्तविकता
हालांकि इन मान्यताओं का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई बार पशु मौसम, बीमारी या डर के कारण भी ऐसा व्यवहार करते हैं। ऐसे में घबराने के बजाय सतर्क रहना ही बेहतर माना जाता है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस

