दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए घोषणा की है कि भारत में निर्मित अथवा आयातित सभी मोबाइल हैंडसेट में संचार साथी ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐप पहली बार डिवाइस सेटअप के दौरान उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए और इसकी कार्यक्षमता को न तो अक्षम किया जाए और न ही सीमित।
90 दिनों में लागू होगा आदेश
निर्देश के अनुसार, सभी कंपनियों को 90 दिनों के भीतर इसे लागू करना होगा, जबकि पूरी अनुपालन रिपोर्ट 120 दिनों में जमा करनी होगी। जो उपकरण पहले ही निर्मित होकर बिक्री चैनलों में मौजूद हैं, उनमें ऐप को सॉफ़्टवेयर अपडेट के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
सरकार का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य नागरिकों को नकली डिवाइसों से बचाना, साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग को सरल बनाना और दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना है।
राजनीतिक विवाद: विपक्ष ने उठाए निजता के सवाल
सरकारी आदेश के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर संसद में बोलेंगे। सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे “पेगासस प्लस प्लस” बताते हुए कहा कि सरकार लोगों की निजी ज़िंदगी पर कब्ज़ा करना चाहती है। राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे “एक और निगरानी तंत्र” करार दिया।
सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास ने भी व्यंग्य करते हुए टिप्पणी की कि अगला कदम नागरिकों के लिए मॉनिटरिंग डिवाइस लगाना होगा। वहीं राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने इसे निजता पर हमला बताया।
इसके विपरीत, भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि इस ऐप से किसी की निजता को खतरा नहीं है और सभी डेटा सुरक्षित रहेगा।
क्या है संचार साथी ऐप?
- संचार साथी ऐप उपयोगकर्ताओं को IMEI नंबर से मोबाइल की प्रामाणिकता जांचने,
- संदिग्ध कॉल/मैसेज रिपोर्ट करने,
- खोए/चोरी हुए फोन की शिकायत दर्ज करने,
- अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन देखने,
- और विश्वसनीय बैंक/वित्तीय संपर्क सूची प्राप्त करने की सुविधा देता है।
सरकार का कहना है कि नकली या डुप्लिकेट IMEI वाले मोबाइल साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। ऐप ब्लॉक या ब्लैकलिस्ट किए गए IMEI की पहचान भी संभव बनाता है, जिससे चोरी हुए फोन के अवैध पुनर्विक्रय को रोका जा सकेगा।
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