अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है और कहा है कि जैसे चीन अमेरिका के लिए खतरा है, वैसे ही अमेरिका भी चीन के लिए खतरा है। ट्रंप ने कहा, “हम उन्हें देखते हैं, वे हमें देखते हैं,” और दुनिया में प्रतिस्पर्धा तेज होने के बावजूद दोनों देशों को टकराव की राह नहीं अपनानी चाहिए।
ट्रम्प ने उस समय यह अभिव्यक्ति दी है जब अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां चीन पर बिजली और पानी जैसी बुनियादी नागरिक संरचनाओं में सेंध लगाने के आरोप लगा रही हैं। राष्ट्रपति ने चीन के बढ़ते परमाणु शस्त्रागार पर भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि यदि यह रफ्तार इसी तरह रही तो चीन कुछ ही वर्षों में रूस और अमेरिका के स्तर के करीब पहुंच सकता है।
परमाणु शस्त्रों पर वार्तालाप: पुतिन-शी से संवाद
ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से परमाणु हथियार घटाने (Denuclearisation) पर बातचीत की है। उनका मानना है कि तीनों वैश्विक शक्ति देशों का मिलकर कदम उठाना न केवल आपसी भरोसा बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी सकारात्मक संदेश होगा। ट्रम्प ने कहा, “हमारे पास इतने हथियार हैं कि हम इस धरती को 150 बार नष्ट कर सकते हैं,” और इसी संदर्भ में उन्होंने निरस्त्रीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतिस्पर्धा पर सीमाएँ: युद्ध नहीं, सहयोग चाहिए
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका, चीन और रूस के बीच प्रतिस्पर्धा जारी रहेगी, पर इसे शत्रुता या खुली टक्कर में बदलने की बजाय कूटनीति और सहयोग के जरिए नियंत्रित करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि मिलकर काम करने से दोनों देशों के लिए बेहतर परिणाम निकल सकते हैं — खासकर आर्थिक, जलवायु और परमाणु सुरक्षा के मुद्दों पर।
ट्रम्प ने अपने हालिया परमाणु परीक्षण के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि चीन और रूस भी परीक्षण कर रहे हैं, और अंतरराष्ट्रीय पारदर्शिता व नियंत्रण की दिशा में कदम उठाना आवश्यक है। उनके मुताबिक, यदि प्रमुख शक्तियां आपसी समझ और हथियार-नियंत्रण पर सहमति बनाती हैं तो यह वैश्विक शांति के लिए एक मजबूत संकेत होगा।
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