अमेरिका में करीब 7 साल बाद सरकार शटडाउन की स्थिति में पहुंच गई है। कांग्रेस फंडिंग बिल पास नहीं कर पाई, जिससे सरकारी कामकाज ठप होने लगा है। रिपब्लिकन सांसदों ने 21 नवंबर तक सरकार को अल्पकालिक फंड देने के लिए विधेयक पेश किया था, लेकिन यह 55-45 के अंतर से गिर गया। विधेयक पारित कराने के लिए कम से कम 60 मतों की ज़रूरत थी।
‘कट्टरपंथी वामपंथ’ पर ठहराया गया ठप्प का आरोप
अमेरिकी आवास एवं शहरी विकास विभाग ने सरकार के शटडाउन के लिए कट्टरपंथी वामपंथ को ज़िम्मेदार ठहराया। विभाग का कहना है कि वामपंथी तब तक सरकार को बंद रखेंगे जब तक उनकी 1.5 ट्रिलियन डॉलर की मांगें पूरी नहीं होतीं। इस बयान पर विवाद बढ़ गया है और इसे अवैध ठहराने की भी मांग उठ रही है। उपभोक्ता समूह पब्लिक सिटीजन ने इस मामले में मुकदमा भी दायर किया है।
सोशल मीडिया पर तेज आरोप-प्रत्यारोप
शटडाउन के बाद डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने एक-दूसरे को गतिरोध का जिम्मेदार ठहराया। डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती पर सवाल उठाए, जबकि रिपब्लिकन ने सेवाओं में बंदी और देरी के लिए डेमोक्रेट्स को दोषी बताया।
शटडाउन से अर्थव्यवस्था पर असर
कांग्रेस के बजट कार्यालय (सीबीओ) के मुताबिक, इस शटडाउन से अमेरिकी सरकार को प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा। करीब 7,50,000 कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नौकरी से बाहर रहना पड़ेगा। हालांकि, शटडाउन खत्म होने के बाद उन्हें पिछला वेतन मिल जाएगा, लेकिन कांग्रेस के सदस्यों को लगातार वेतन मिलता रहेगा। सीबीओ ने चेतावनी दी है कि लंबे शटडाउन से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।
पिछले शटडाउन से मिला सबक
ट्रम्प के कार्यकाल (2018-19) में हुए शटडाउन से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लगभग 3 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट और भी भारी पड़ सकता है।
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