लंदन, खबर संसार। जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए नर्स ने कोविड कोमा में 28 दिन बिताए। डॉक्टरों ने उसे प्रयोग के तौर पर इलाज के दौरान वियाग्रा दिया जिससे उसकी सेहत में सुधार देखने को मिला। गेन्सबोरो की निवासी 37 साल की मोनिका अल्मीडा को 9 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बता दें की मोनिका नाम की एक नर्स जो गंभीर से कोरोना संक्रमण के चलते मौत के बिल्कुल करीब पहुंच गई थी और लंबे समय से कोमा में थी, वह वियाग्रा के इलाज के बाद अब रिकवर कर रही है। मोनिका की 31 अक्टूबर को कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। अस्पताल में भर्ती किए जाने के एक हफ्ते बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें कोमा में भेज दिया।
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28 दिन बाद आया हाेश
मोनिका ने बताया कि उन्हें 14 नवंबर को होश आया और सेहत में सुधार महसूस हो रहा है। उम्मीद खो चुके डॉक्टर 72 घंटे बाद उनके वेंटिलेटर को बंद करने वाले थे। जब वह होश में आई तो डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उन्हें वियाग्रा की एक बड़ी खुराक प्रयोगात्मक इलाज के रूप में दी गई थी जिसके लिए वह कोमा में जाने से पहले सहमत हुई थी।
वियाग्रा से इलाज को पहले समझा मजाक
यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन दवा शरीर के सभी क्षेत्रों में रक्त प्रवाह को सक्षम बनाती है। उन्होंने बताया कि इससे सिर्फ एक हफ्ते में ही उनके सेहत में सुधार होना शुरू हो गया और उनका ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ने लगा। मेनिका ने कहा कि जब डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मेरा इलाज वियाग्रा से किया गया है तो मुझे बहुत हंसी आई। मैंने सोचा कि वह मजाक कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कहा कि हां, वास्तव में उन्हें दवा के रूप में वियाग्रा की ही खुराक दी गई है।
परिवार के साथ मनाया क्रिसमस का त्योहार
आखिरी पलों में डॉक्टरों ने मोनिका को वियाग्रा की खुराक देने का फैसला लिया जिसे पहले कोविड रोगियों के इलाज के तरीके के रूप में सुझाया गया था। 14 दिसंबर को मोनिका को होश आया और क्रिसमस की पूर्व संध्या पर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। फिलहाल डॉक्टर इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या वियाग्रा का उपयोग ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।


