HomeNationalPakistan न्यूक्लियर साइट पर क्या हुआ? ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा दावा

Pakistan न्यूक्लियर साइट पर क्या हुआ? ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा दावा

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान एक कथित एयरस्ट्राइक को लेकर अब नया दावा सामने आया है। सवाल यह है कि क्या यह हमला इतना प्रभावी था कि पाकिस्तान को अंततः युद्धविराम की राह चुननी पड़ी? दुनिया के जाने-माने एविएशन इतिहासकार Tom Cooper ने दावा किया है कि पाकिस्तान के संवेदनशील किराना हिल्स क्षेत्र को निशाना बनाया गया था और इस स्ट्राइक ने हालात बदल दिए थे।


टॉम कूपर का बड़ा खुलासा

एक इंटरव्यू में टॉम कूपर ने कहा कि ऐसे ठिकाने पर हमला तभी किया जाता है जब मकसद सीधे और स्पष्ट तरीके से संदेश देना हो—बिना बड़े पैमाने पर तबाही मचाए।

उनके मुताबिक, यह संकेत था कि भारत किसी भी समय, किसी भी स्थान को सटीकता से निशाना बना सकता है। कूपर ने यह भी कहा कि उस समय पाकिस्तान पर भारी दबाव था और बाद की कूटनीतिक गतिविधियां इसका संकेत देती हैं।


क्या थे हमले के सबूत?

कूपर ने दावा किया कि उनके पास सिर्फ एक नहीं बल्कि कई प्रमाण हैं:

  • स्थानीय स्रोतों के वीडियो, जिनमें मिसाइलों के निशान और विस्फोट दिखाई देते हैं
  • पाकिस्तान एयर फोर्स के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से उठता धुआं
  • रडार सिस्टम और अंडरग्राउंड स्टोरेज के प्रवेश द्वारों पर हमले के संकेत

उनका कहना है कि पहले रडार स्टेशनों को निष्क्रिय किया गया, ताकि जवाबी कार्रवाई की क्षमता कम हो सके। इसके बाद भूमिगत संरचनाओं के प्रवेश द्वारों को निशाना बनाया गया।


क्यों अहम है किराना हिल्स?

कूपर के अनुसार, किराना हिल्स पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां अतीत में कई नॉन-क्रिटिकल परमाणु परीक्षण किए गए थे।

उन्होंने कहा कि इस जगह पर मौजूद मजबूत शेल्टर, मेंटेनेंस सुविधाएं और दर्जनों भूमिगत प्रवेश द्वार यह संकेत देते हैं कि यह कोई सामान्य सैन्य ठिकाना नहीं था।


क्या इसी हमले से हुआ सीज़फायर?

विश्लेषक के मुताबिक, उस समय पाकिस्तान का जवाबी अभियान विफल हो चुका था। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने कई हमलों को नाकाम किया। इसके बाद मई की सुबह हुए बड़े स्ट्राइक ने स्थिति को निर्णायक मोड़ दिया।

हालांकि कूपर ने यह नहीं कहा कि पाकिस्तान “गिड़गिड़ा” रहा था, लेकिन उन्होंने माना कि परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं कि उसे युद्धविराम की दिशा में कदम बढ़ाने पड़े।


कूटनीतिक हलचल भी बनी संकेत

कूपर के मुताबिक, उस दौरान इस्लामाबाद द्वारा वॉशिंगटन और नई दिल्ली से लगातार संपर्क साधना इस बात का संकेत था कि दबाव बढ़ चुका था।

उन्होंने यह भी कहा कि इतनी संवेदनशील जगह पर हमला तभी किया जाता है जब आपको यकीन हो कि सामने वाला पक्ष तुरंत और प्रभावी जवाब देने की स्थिति में नहीं है।


इस खबर से जुड़े 5 प्रमुख टॉपिक

  1. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक सैन्य रणनीति
  2. किराना हिल्स और पाकिस्तान का परमाणु ढांचा
  3. एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका
  4. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और युद्धविराम
  5. रक्षा विश्लेषकों के दावे बनाम आधिकारिक बयान

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