खबर संसार, नई दिल्ली : Sharad Purnima का क्यों है इतना महत्व, ऐसे मनाए ये खास पर्व, शरद पूर्णिमा जिसको हम शरदोत्सव के नाम से भी जानते हैं। इस दिन चांदनी रात में खीर बनाकर रखने का विशेष महत्व बताया गया है। बताते हैं कि चांद के नीचे रात्रि में खीर रखने से चंद्रमा की किरणें जब इस खीर पर पड़ती हैं तो वह इसे खास बना देती हैं। फिर रात के 12 बजे के बाद उस खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। Sharad Purnima के दिन रात्रि को सोना वर्जित है। इस दिन रात्रि में भजन और पूजन करना चाहिए।
ये भी पढें- तुला राशि वालों के लिए आज के दिन व्यापार में धन लाभ की स्थिति
शरद पूर्णिमा का क्या है महूर्त
शरद पूर्णिमा इस वर्ष 19 अक्टूबर मंगलवार को मनाई जाएगी। जो शाम 7.45 बजे शुरू होगी। और पूर्णिमा का समापन 20 अक्टूबर 8.28 बजे रात्रि को होगा। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन दूध या खीर का प्रसाद वितरण करने से चंद्रदोष दूर हो जाता है। और मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। खीर पर अमृत किरणों के पड़ने से कई तरह के रोग नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि यह वह दिन है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करता है।
इसलिए खास है Sharad Purnima
- Sharad Purnima को शरद पूर्णिमा इस लिए कहते हैं कि इन दिनों से सुबह और शाम को सर्दी का अहसास होने लगता है। रात में चांद की किरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है।
- चंद्रमा की किरणें खीर में पड़ने से यह कई गुना गुणकारी और लाभकारी हो जाती है। इसलिए इस दिन लोग दूध या खीर को चंद्रमा के प्रकाश में रखते हैं।
- शरद पूर्णिमा के दिन चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है। इस दिन चांद का प्रकाश अन्य दिनों की अपेक्षा काफी तेज होता है। रात्रि में चांद आम दिनों की अपेक्षा लगभग 14 प्रतिशत बड़ा और चमकदार दिखाई देता है।



