खबर संसार किच्छा दिलीप अरोरा।किच्छा के तिवारी की कैंची से किसका कटेगा वोट । जी हा किच्छा विधान सभा मे चुनावी मुकाबला बहुत ही दिलचस्प स्थिति मे है यहां किसी की भी जीत की गरंटी देना बेवकूफी ही होगी।
पार्टी प्रत्याक्षी के बाद निर्दलियो ने नमांकन कर किच्छा के नेताओं के सामने चौनौती तो ख़डी कर ही दी थी किन्तु हरीश पनेरू के नामंजन वापिस लेने से कांग्रेस प्रत्याक्षी को तो कुछ राहत मिली लेकिन कितनी यह भी वक़्त बताएगा।
लेकिन अजय तिवारी अभी हुई मैदान मे है और कुछ लोग इनको वोट कटवा भी बता रहे है चूंकि यह भाजपा खेमे से आते है तो निश्चित है की इनके मैदान मे रहने से भाजपा को नुकसान होगा और कही न कही मोदी की डबल इंजन वाली सरकार का एक इंजन रूक सकता है क्योंकि सत्कार बनाने के लिए हर एक विधान सभा जितना जहाँ आवश्यक होता है तो साथ ही एक एक वोट भी।
कल पुरानी मंडी मे भाजपा प्रत्याक्षी के लिए वोट मांगने के लिए आये भाजपा प्रवक्ता आर पी सिंह ने भी इसी बात का जिक्र किया और कहा की वोट कटवा से सावधान रहे।अब तिवारी का चुनावी निशान भी कैंची है तो ऐसे मे आर पी सिंह ने हाथ से कैंची का भी इशारा किया।
*क्या भाजपा के वोट बैंक पर चलेगी कैंची*
तिवारी भाजपा से टिकट मांग रहे थे पर टिकट न मिलने से वो खफा होकर निर्दलीय ही मैदान मे उतर गये।अब क्षेत्र मे यही चर्चाये है की वह किसका वोट काटेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं की उनसे क्षेत्र का युवा भारी संख्या मे जुडा है और इन युवाओं मे सभी समाज के युवा है। और तिवारी इससे पहले कांग्रेस पार्टी मे भी रह चुके है। तो इस आधार पर उनका चुनाव लड़ना दोनों पार्टियों के वोट बैंक पर कैंची चलने जैसा ही होगा।लेकिन भाजपा को थोड़ा सा ज्यादा।
*क्या तिवारी की कैंची से होगा कांग्रेस को नुकसान*
अटकले यह भी है की तिवारी पहले कांग्रेस मे थे तो इनके साथ कुछ कांग्रेस युवा भी जुडा है। तो थोड़ा सा नुकसान यह कांग्रेस को भी पंहुचा सकते है।और कांग्रेस के वो क्षेत्रीय नेता जो विधयाक बनने का खुवाब देख रहे थे वह मज़बूरी मे शांत हुए है और हो सकता है की वह अंदर खाने अजय तिवारी की कैंची से कांग्रेस प्रत्याक्षी के वोट काट सकते है।
*तिवारी की कैंची किस किस पर भारी*
भाजपा और कांग्रेस मे सबसे ज्यादा तिवारी किस पर भारी पड़ सकते है यह 10 मार्च को ही पता चल पायेगा। फिलहाल तो कैंची हाथी, साइकल और झाड़ू पर भारी पढ़ती दिख रही है।



