खबर संसार, नई दिल्ली : नवरात्रि का सातवां दिन, अर्थात दुष्टों का संहार करने वाली हैं मां kaalratri, नवरात्रि का सातवां दिन अर्थात मां कालरात्रि के पूजन का दिन। मां कालरात्रि के पूजन का विशेष विधान है। आज 8 अप्रैल को कालरात्रि को पूजन करने का विशेष महत्व है। मां कालरात्रि दुर्गा मां का सातवां स्वरूप माना गया है। मां दुर्गा ने ही असुरों का वध करने के लिए ये रूप धारण किया था। मां के चार हाथ हैं। उनके एक हाथ में खड्ग (तलवार), दूसरे लौह शस्त्र, तीसरे हाथ में वरमुद्रा और चैथा हाथ अभय मुद्रा में हैं। मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ है।
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नवरात्रि के सातवें दिन को दुर्गा सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। इस दिन मां kaalratri की पूजन का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मां कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है।
मां kaalratri, का प्रिय रंग और पुष्प-
मां kaalratri, को रातरानी का पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि को लाल रंग प्रिय है। इसलिए पूजा के समय लाल रंग का गुलाब या गुड़हल अर्पित करना चाहिए। मां कालारात्रि को प्रसन्न करने के लिए उन्हें गुड़ या गुड़ से बने व्यंजनो को भोग लगाना चाहिए। इस दिन काली चालीसा, काली पुराण, सिद्ध कुंजिका स्त्रोत, अर्गला स्तोत्रम का पाठ करना चाहिए।
मां कालरात्रि पूजन विधि-
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि का पूजन किया जाता है। माता रानी को अक्षत, पुष्प, धूप, गंधक और गुड़ आदि का भोग लगाएं। मां कालरात्रि को रातरानी पुष्प अतिप्रिय है। पूजन के बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करना चाहिए। व अंत में आरती उतारें।



