नई दिल्ली, खबर संसार। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में राष्ट्रपति भवन में भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश हैं। जस्टिस एनवी रमण का सीजेआई के रूप में कार्यकाल 26 अगस्त को समाप्त हो गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस ललित को सीजेआई पद की शपथ दिलाई।
देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में वह सिर्फ 74 दिन के लिए सर्वोच्च अदालत की कमान संभालेंगे। सीजेआई के रूप में जस्टिस यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट की उस कॉलेजियम का नेतृत्व करेंगे, जिसमें जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कौल, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी शामिल होंगी।
शांत व सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं जस्टिस ललित
पूर्व सीजेआई जस्टिस एनवी रमण अपने 16 माह के कार्यकाल में जहां 29 भाषणों और दर्जनों टिप्पणियों के जरिए हमेशा चर्चा में रहे, वहीं जस्टिस यूयू अदालत से बाहर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी बेहद कम टिप्पणियां करते हैं। यहां तक की अदालत में भी उनकी गिनी चुनी 1 या 2 टिप्पणियां ही सामने आई हैं। जस्टिस ललित शांत रहकर अपना काम करते हैं।
जस्टिस ललित का न्याय और कानून के क्षेत्र से जुड़ाव उनकी पैदाइश के साथ ही हो गया था। क्योंकि उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी इस क्षेत्र में रही है। एक तरह से कह सकते हैं कि कानून और न्याय का ज्ञान उन्हें विरासत में मिला है। जस्टिस ललित के दादा रंगनाथ ललित एक सम्मानित वकील रहे हैं। इस सफर को उनके बेटे आरयू ललित ने एक कदम और आगे बढ़ाया और वह वकील से बॉम्बे हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए। जस्टिस यूयू ललित अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के वकील रहे, फिर सुप्रीम कोर्ट के जज बने और अब देश के मुख्य न्यायाधीश पद तक पहुंचे हैं।
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