पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव न सिर्फ आगामी लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी की इसी नई लीडरशिप के प्रमुख चेहरे हैं। ये दोनों ही दिग्गज भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय क्षत्रप बनकर उभरे हैं, जिनमें से एक ने उत्तर प्रदेश जैसे सियसी महत्व वाले राज्य में पार्टी के पैरों को मजबूत किया तो वहीं दूसरे ने पूर्वोत्तर में बीजेपी का परचम लहराया।
इन दोनों नेताओं में एक गुण समान है, वो है हिंदुत्व के बल्ले से बल्लेबाजी करने की कला का। गोरखनाथ मठ के महंत योगी आदित्यनाथ तो हिंदुत्व को लेकर शुरुआत से ही मुखर थे और उनकी इस पर्सनैलिटी से मिली पॉपुलैरिटी ने बीजेपी में उनके कद को मजबूत कर दिया। वहीं हिमंत बिस्वा सरमा पुराने कांग्रेसी हैं, जो बगावत के बाद बीजेपी से जुड़े और पार्टी का परचम उन्होंने पूर्वोत्तर में लहराने का काम किया।
आखिर क्या है BJP की मंशा
अब बीजेपी पूर्वोत्तर के इस क्षत्रप का इस्तेमाल मध्य भारत के राज्यों में भी बखूबी कर रही है। 8 से 13 नवंबर के बीच हिमंत बिस्वा सरमा ने मध्य प्रदेश के चार दौरे किए और 15 रलियों को संबोधित किया। जबकी बीजेपी के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह ने सिर्फ 12 रैलियां ही कीं। ये तो हो गई बात पार्टी में बढ़ते उनके कद की। अब देखते हैं कि बीजेपी ने किन-किन इलाकों में सरमा को भेजा और उनके दौरों के जरिए पार्टी की मंशा क्या रही।
उन्होंने भूपेश बघेल सरकार पर धर्मांतरण को इजाजत देकर राज्य में सनातन को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। बीजेपी राज्य में धर्मांतरण के खिलाफ लगातार मुखर रही है। और अगर सरमा की सभाओं की मेजबानी करने वाली विधानसभाओं को देखा जाए तो इसमें बीजेपी की वो रणनीति साफ दिखाई देती है, जिसमें सरमा को हिंदुत्व के नए चेहरे के तौर पर पेश किया जा रहा है।
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