बैंक में खाता खुलवाते वक्त ग्राहक से कई जानकारियां और दस्तावेज मांगे जाते हैं। इन्हीं में सबसे अहम है अकाउंट ओपनिंग फॉर्म पर किया गया सिग्नेचर। यही दस्तखत आगे चलकर बैंकिंग से जुड़े हर काम जैसे चेक, ट्रांजैक्शन और जरूरी दस्तावेजों में पहचान का आधार बन जाते हैं।
लेकिन समय के साथ बहुत से लोग अपना पुराना सिग्नेचर भूल जाते हैं या लिखावट बदल जाने से समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसी स्थिति में बैंकिंग लेन-देन पर रोक लग सकती है।
सिग्नेचर मैच न होने पर क्या होता है?
अगर चेक पर किया गया सिग्नेचर बैंक के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, तो ट्रांजैक्शन रोक दिया जाता है। कई बार पेमेंट अटक जाता है और ग्राहक को असुविधा झेलनी पड़ती है। बैंक इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला मानता है, क्योंकि गलत सिग्नेचर धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
क्या बैंक खाता बंद कर देता है?
इस स्थिति में बैंक सीधे तौर पर ग्राहक का अकाउंट बंद नहीं करता। बल्कि वह ग्राहक को सूचित करता है कि उसके सिग्नेचर में अंतर पाया गया है। इसके बाद ग्राहक को सिग्नेचर अपडेट कराने का अवसर दिया जाता है।
नया सिग्नेचर कैसे दर्ज करें?
ग्राहक को बैंक जाकर अपनी पहचान साबित करनी होती है। इसके लिए वैध पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी है। बैंक डॉक्युमेंट्स वेरिफाई करने के बाद सिस्टम में नया सिग्नेचर दर्ज कर देता है।
कुछ बैंक बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी देते हैं, जिससे ग्राहक अपना पुराना सिग्नेचर देख सकता है और नया अपडेट कर सकता है। हालांकि, इसके लिए बैंक द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस
