बीजिंग में आयोजित एक विशाल सैन्य परेड के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक नेताओं को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब यह तय करना होगा कि वह शांति का रास्ता चुनेगी या युद्ध का। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के 80 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई। हजारों सैनिक और आधुनिक हथियारों के प्रदर्शन ने चीन की सैन्य शक्ति का संकेत दिया।
अमेरिकी व्यवस्था को चुनौती
शी जिनपिंग ने कहा कि जैसे अतीत में चीन ने अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी, वैसे ही आज मानवता को संवाद या टकराव, जीत-जीत सहयोग या शून्य-योग के बीच निर्णय लेना होगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश अमेरिकी नेतृत्व वाले वैश्विक ढांचे को चुनौती देने का संकेत है।
मित्र देशों की मौजूदगी और शक्ति प्रदर्शन
इस परेड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन सहित 26 देशों के नेता शामिल हुए। इसे चीन की राजनयिक ताकत का प्रदर्शन माना जा रहा है। वहीं अमेरिका, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों ने दूरी बनाई। जापान द्वारा नेताओं से इस परेड में भाग न लेने की अपील पर चीन और जापान के बीच तनाव बढ़ गया।
सैन्य ताकत का प्रदर्शन और प्रतीकात्मकता
शी जिनपिंग ने माओत्से तुंग जैसी पोशाक पहनकर खुली होंगकी लक्जरी कार से सैनिकों का निरीक्षण किया। उनके सामने हाई-टेक हथियार रखे थे, जिनमें से कई पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाए गए। यह आयोजन 2015 के बाद पहली बार हुआ और इसका मकसद दुनिया को बीजिंग की शक्ति और संकल्प का संदेश देना था।
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