पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इसी घटनाक्रम के बीच भारत की ओर से आया आधिकारिक बयान भी चर्चा का केंद्र बन गया है।
शांतिपूर्ण मार्च के दौरान फायरिंग का आरोप
रावलकोट बस स्टैंड पर बड़ी संख्या में लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, शांतिपूर्ण जन मार्च के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य मुजफ्फराबाद पहुंचकर सरकार के समक्ष अपनी 38 सूत्रीय मांगें रखना था।
आरोप है कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद भीड़ के पीछे नहीं हटने पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने कथित तौर पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में आठ नागरिकों की मौत होने और सैकड़ों लोगों के घायल होने का दावा किया गया है।
सुधानोटी इलाके में भी हिंसा के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, सुधानोटी क्षेत्र में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई। सामने आए वीडियो में सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। इस हिंसा के बाद कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल बताए गए हैं।
बिजली, आटा और भ्रष्टाचार से शुरू हुआ आंदोलन
बताया जा रहा है कि इस आंदोलन की शुरुआत बिजली की बढ़ती कीमतों, आटे की कमी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरोध से हुई थी। जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAC) ने सस्ती बिजली, गेहूं पर राहत और भ्रष्टाचार खत्म करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने बातचीत के बजाय आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की। आंदोलन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी और इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके बाद प्रदर्शन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों ने क्षेत्र में कथित शोषण के खिलाफ भी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी।
लोगों ने उठाए संसाधनों पर सवाल
आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि यदि क्षेत्र की नदियों से बिजली पैदा होती है तो स्थानीय लोगों को महंगी बिजली क्यों मिलती है और यदि यहां का अनाज दूसरे हिस्सों में भेजा जाता है तो स्थानीय लोगों को खाद्यान्न संकट का सामना क्यों करना पड़ रहा है।
भारत का कड़ा रुख आया सामने
घटनाक्रम के बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूदा स्थिति वहां लंबे समय से जारी कथित शोषण का परिणाम है। भारत ने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में लोगों के मौलिक अधिकारों का लगातार उल्लंघन किया गया है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उम्मीद जताई कि इन घटनाओं के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस बयान को PoJK के मुद्दे पर भारत के स्पष्ट और सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
15 जुलाई के मार्च पर टिकी निगाहें
मुजफ्फराबाद की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर कंटेनर लगाए जाने और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में 15 जुलाई को प्रस्तावित मार्च को पूरे घटनाक्रम का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें- Anushka ने प्यूमा पर लगाया बिना परमिशन फोटो इस्तेमाल करने का आरोप
हमारे फ़ैज़ी वेबसाइट से जुड़ने के लिए क्लिक करें

