अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मिस्र में हुए शांति सम्मेलन के दौरान उन्होंने दावा किया कि गाज़ा और इज़रायल के बीच युद्ध विराम उन्हीं की मध्यस्थता से हुआ। ट्रंप ने भाषण में कहा कि उन्होंने दोनों देशों को बातचीत की राह पर लाया, जिससे “दुनिया में शांति की दिशा” में बड़ा कदम बढ़ा।
हालांकि, इस समझौते पर हमास की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे की सत्यता पर सवाल उठ रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने इसे “एकतरफा घोषणा” बताया है।
पाकिस्तान ने फिर की चापलूसी, ट्रंप को बताया ‘शांति का मसीहा’
सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने ट्रंप की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि “आज का दिन इतिहास का सबसे महान दिन है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों से गाज़ा में शांति आई है।”
उन्होंने यह तक कहा कि ट्रंप की टीम ने पहले भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका था और अब मध्य पूर्व में शांति स्थापित की है।
शहबाज़ ने ट्रंप को “नोबेल शांति पुरस्कार” के लिए नामित करने का प्रस्ताव भी रख दिया। उनके इस बयान पर कई अंतरराष्ट्रीय नेता असहज नजर आए।
मेलोनी का हावभाव बना चर्चा का विषय
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भी इस मौके पर मौजूद थीं। शहबाज़ की अतिशयोक्ति सुनते हुए उनके चेहरे के भाव बताते थे कि वो खुद हैरान थीं — यह मंच गाज़ा की शांति के लिए था या ट्रंप की तारीफ के लिए?
गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक नाटक
जहां पूरी दुनिया गाज़ा में शांति बहाल करने के उपायों पर चर्चा कर रही थी, वहीं पाकिस्तान ने भारत-पाक संघर्ष को बीच में लाकर ट्रंप को हीरो बनाने की कोशिश की। एक बार फिर पाकिस्तान के झूठ और चापलूसी ने कूटनीतिक मंच को राजनीतिक रंग दे दिया।
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