भारतीय सिनेमा के दिग्गज हास्य अभिनेता गोवर्धन असरानी, जिन्हें पूरी दुनिया असरानी के नाम से जानती है, का सोमवार को मुंबई में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 84 वर्षीय असरानी को चार दिन पहले जुहू स्थित भारतीय आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 20 अक्टूबर की दोपहर करीब 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार सांताक्रूज़ श्मशान घाट पर किया गया।
उनके निजी सहायक बाबूभाई ने बताया कि असरानी साहब के फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो गया था, जिसके चलते उनकी हालत बिगड़ गई। परिवार ने उनकी इच्छा के अनुसार शांति से अंतिम संस्कार किया और बाद में निधन की जानकारी साझा की।
50 साल का सुनहरा सफर: शोले से लेकर नमक हराम तक
350 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम कर चुके असरानी भारतीय सिनेमा के सबसे प्रिय हास्य कलाकारों में गिने जाते थे। उनकी ‘शोले’ (1975) में सनकी जेलर की भूमिका आज भी दर्शकों के दिलों में बसती है। 1970 और 1980 का दशक असरानी के करियर का स्वर्ण काल रहा। उन्होंने राजेश खन्ना के साथ करीब 25 फिल्मों में अभिनय किया — जिनमें बावर्ची, नमक हराम और महबूबा जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।
प्रारंभिक जीवन और अभिनय की शुरुआत
1 जनवरी 1941 को जयपुर, राजस्थान में जन्मे असरानी ने आरंभिक जीवन में ही अभिनय को अपनाया। उन्होंने FTII पुणे से प्रशिक्षण प्राप्त किया और 1967 में हरे कांच की चूड़ियाँ से अपने करियर की शुरुआत की। उन्हें पहला बड़ा मौका ऋषिकेश मुखर्जी की सत्यकाम (1969) से मिला, जिसने उनके अभिनय सफर को नई दिशा दी।
अमर हो गई असरानी की कला
असरानी न केवल हास्य कलाकार थे बल्कि एक निर्देशक और चरित्र अभिनेता के रूप में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। उनके निधन से फिल्म उद्योग में शोक की लहर है। उन्होंने कुछ घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर दिवाली 2025 की शुभकामनाएं दी थीं, जिससे प्रशंसक और भी भावुक हो उठे।
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