नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आवारा कुत्तों के मामले (Stray Dogs Matter) में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने की मांग की थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट कहा कि मुख्य सचिवों को अदालत में फिजिकली पेश होना ही होगा। बेंच ने राज्यों द्वारा कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर कड़ी नाराजगी जताई।
“अनुपालन न करने वालों से कोर्ट खुद निपटेगी”
जस्टिस विक्रम नाथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अदालत को ऐसे मुद्दों पर समय खर्च करना पड़ रहा है, जिन्हें वर्षों पहले ही नगर निगमों और राज्य सरकारों को सुलझा लेना चाहिए था।
कोर्ट ने कहा, “संसद नियम बनाती है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। हम अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहते हैं, लेकिन अधिकारी सोए रहते हैं। न्यायालय के आदेशों का कोई सम्मान नहीं! अब वे स्वयं आएंगे और बताएंगे कि हलफनामे क्यों नहीं दाखिल किए गए।”
सॉलिसिटर जनरल ने हालांकि यह जानकारी दी कि सभी राज्यों ने अब अनुपालन हलफनामे दाखिल कर दिए हैं, लेकिन अदालत ने कहा कि वे इसे स्वयं सत्यापित करेगी।
27 अक्टूबर को दिया था पेशी का आदेश
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने पशु जन्म नियंत्रण नियमों (Animal Birth Control Rules) के अनुपालन पर रिपोर्ट दाखिल न करने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों को अदालत में तलब किया था।
कोर्ट ने पाया था कि केवल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम ने ही 22 अगस्त के आदेश के अनुसार हलफनामे जमा किए हैं। बाकी सभी राज्यों को कोर्ट ने आदेश दिया कि वे अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बताएं कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस
