लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद सत्र के दौरान अपने खिलाफ संभावित विशेषाधिकार प्रस्ताव के सवाल पर मीडिया के एक वर्ग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पत्रकारों को निष्पक्ष रहना चाहिए और किसी राजनीतिक दल की “दी हुई लाइन” पर अपना कार्यक्रम नहीं चलाना चाहिए।
“निष्पक्षता आपकी जिम्मेदारी है”
जब उनसे सरकार द्वारा विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की योजना पर सवाल पूछा गया, तो राहुल गांधी ने कहा, “आप पूरी तरह से भाजपा के गुलाम नहीं हैं। कम से कम थोड़ा तो निष्पक्ष होकर काम कीजिए। यह बेहद शर्मनाक है… हद हो गई है।” उन्होंने मीडिया को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि एकतरफा रिपोर्टिंग देश का अपमान है।
सरकार का रुख क्या है?
इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संकेत दिए कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है। रिजिजू के अनुसार, गांधी ने सदन को कथित तौर पर गुमराह किया और बेबुनियाद आरोप लगाए। हालांकि प्रस्ताव कब और किसके द्वारा लाया जाएगा, इस पर अभी स्पष्टता नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष का कोई सदस्य इसे पेश कर सकता है।
विवाद की जड़: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता
पूरा विवाद केंद्रीय बजट पर बहस के दौरान राहुल गांधी के बयान से जुड़ा है। उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को “आत्मसमर्पण” करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने “भारत माता को बेच दिया।” गांधी ने कहा कि समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार होती, तो अमेरिका से बराबरी के आधार पर समझौता किया जाता। संसद में जारी इस टकराव से सियासी माहौल और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं। विशेषाधिकार प्रस्ताव लाए जाने की स्थिति में सदन में तीखी बहस और बढ़ सकती है।
इसे भी पढे: देहरादून में फिर से एक बड़ा हादसा होने से टला, लड़की को आई करछी से चोट
हमारे फेबुकपेज से जुडने के लिए क्लिक करें



