रूस में भारतीय वर्कर्स की मांग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस लेबर संकट से जूझ रहा है और इस कमी को पूरा करने के लिए भारतीय कामगारों पर भरोसा जता रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक रूस की ओर से कोई आधिकारिक बयान या नया कानून सामने नहीं आया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि युद्ध और सुरक्षा हालात के चलते रूस को बड़ी संख्या में भरोसेमंद श्रमिकों की जरूरत है। ऐसे में भारत एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहा है।
इजराइल जैसा रुख अपनाने की चर्चा
बताया जा रहा है कि रूस की सोच कुछ हद तक इजराइल के फैसले से मिलती-जुलती है। हमास के आतंकी हमलों के बाद इजराइल ने स्थानीय फिलिस्तीनी कामगारों की जगह भारतीय वर्कर्स को प्राथमिकता दी थी।
इजराइल का मानना था कि भारतीय कामगार भरोसेमंद हैं और देश की सुरक्षा के लिए जोखिम नहीं बनेंगे। पिछले दो वर्षों में इजराइल ने बड़ी संख्या में भारतीयों को काम पर रखा है। इसी मॉडल को अब रूस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
मॉस्को आतंकी हमले के बाद बदला माहौल
साल 2024 में रूस की राजधानी मॉस्को में हुए बड़े आतंकी हमले ने देश को हिला दिया था। इस हमले में 137 से अधिक लोगों की जान गई। जांच में सामने आया कि हमलावर सेंट्रल एशियाई देश ताजिकिस्तान से जुड़ा था। इस घटना के बाद रूस में सेंट्रल एशियाई देशों के नागरिकों को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गईं।
C5+1 बैठक से बढ़ी रूस की नाराजगी
हमले के कुछ महीनों बाद सेंट्रल एशिया के पांच देशों ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस बैठक को C5+1 फॉर्मेट कहा गया, जिसमें पांच सेंट्रल एशियाई देश और अमेरिका शामिल थे।
बैठक के बाद उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा ट्रंप को “प्रेसिडेंट ऑफ द वर्ल्ड” कहे जाने की खबर सामने आई, जिससे रूस में नाराजगी देखी गई।
भारत-रूस संबंधों की बढ़ती नजदीकी
पिछले तीन वर्षों में भारत और रूस के रिश्तों में और मजबूती आई है। ऊर्जा, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में रूस भारतीय वर्कर्स को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहा है।
दावा किया जा रहा है कि युद्ध के कारण पैदा हुए लेबर संकट को दूर करने के लिए रूस को बड़ी संख्या में भारतीय कामगारों की आवश्यकता है। हालांकि, इस विषय में अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल यह साफ है कि रूस ने भारतीयों को नौकरी देने को लेकर कोई नया कानून पास नहीं किया है और न ही आधिकारिक घोषणा की है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और हालिया घटनाक्रमों के आधार पर यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।आने वाले समय में रूस की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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