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ईरान ड्रोन अटैक से UAE ऑयल रिफाइनरी तबाह, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान के ड्रोन हमले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह स्थित एक महत्वपूर्ण ऑयल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में रिफाइनरी परिसर में व्यापक तबाही दिखाई दे रही है। यह हमला 5 मार्च को हुआ था, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा भारी नुकसान

ड्रोन हमले के बाद जारी सैटेलाइट इमेज में रिफाइनरी के कई हिस्से क्षतिग्रस्त नजर आ रहे हैं। तेल भंडारण टैंक और आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।


होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट का सबसे अहम समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। पिछले 24 घंटों में एक भी तेल टैंकर इस मार्ग से नहीं गुजरा है। यह जलमार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम है। मिडिल ईस्ट से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल और गैस की आपूर्ति का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर इस मार्ग पर देखा जा रहा है।


युद्ध के बीच भारत के व्यापार पर क्या असर?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच भारत के व्यापार पर असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय रोजाना निर्यातकों के साथ बैठक कर रहा है और उद्योग जगत को हर संभव समर्थन दिया जाएगा। गोयल ने कहा कि भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और कोविड-19 महामारी के दौरान भी देश ने अपने दायित्वों को पूरा किया था। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद बांग्लादेश की राजधानी ढाका में विरोध प्रदर्शन हुआ। शिया मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध जताया।


ईरान में 3,643 सिविलियन साइट्स को नुकसान

ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अध्यक्ष पीर होसैन कोलीवंद ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान में 3,643 नागरिक ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • 3,090 आवासीय मकान
  • 528 कमर्शियल और सर्विस सेंटर
  • 14 मेडिकल या फार्मास्यूटिकल सुविधाएं
  • 9 रेड क्रिसेंट सोसाइटी के केंद्र

कोलीवंद के अनुसार, कई हमले घनी आबादी वाले इलाकों में हुए, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए।


चीन की भूमिका पर नजर, लेकिन सीधा हस्तक्षेप मुश्किल

विश्लेषकों का मानना है कि चीन स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है, लेकिन सीधे सैन्य हस्तक्षेप की संभावना फिलहाल कम है। चीन और ईरान के बीच ऊर्जा और रणनीतिक संबंध जरूर हैं, लेकिन बीजिंग का मुख्य फोकस मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति को बिना बाधा जारी रखना है। 2021 में दोनों देशों के बीच 25 साल का 400 अरब डॉलर का समझौता हुआ था, हालांकि कई परियोजनाएं अभी आगे नहीं बढ़ सकी हैं।


लंदन में ईरान के लिए जासूसी के शक में 4 गिरफ्तार

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में पुलिस ने ईरान के लिए जासूसी करने के शक में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग यहूदी समुदाय के लोगों की निगरानी कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक ईरानी नागरिक और तीन ईरानी मूल के व्यक्ति शामिल हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों को लेकर सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है। उन्होंने कहा कि ईरान भारत का पुराना मित्र रहा है और प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान देना चाहिए।


100 घंटों में अमेरिका का 3.7 अरब डॉलर खर्च

अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के शुरुआती 100 घंटों में अमेरिकी सरकार को लगभग 3.7 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ा है। वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती चरण में महंगे और हाई-टेक हथियारों के इस्तेमाल के कारण लागत ज्यादा रही। इसमें B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स, टॉमहॉक क्रूज मिसाइल और प्रिसिजन-गाइडेड हथियार शामिल थे।


ईरान ने कहा – लंबी जंग के लिए तैयार

ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नईनी ने कहा कि ईरान लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में ऐसे उन्नत हथियार इस्तेमाल किए जाएंगे जो अभी तक इस संघर्ष में नहीं देखे गए हैं।


युद्ध में अब तक 1,230 लोगों की मौत

ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी और तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक इस संघर्ष में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ी नागरिक हताहत घटना 28 फरवरी 2026 को हुई, जब दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर हमले में करीब 165 से 175 छात्राएं और स्टाफ मारे गए।


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