पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच संवाद कायम रखने की पूरी कोशिश की। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा सीजफायर की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि आगे की बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बन सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान भविष्य में भी मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है और दोनों पक्षों से सीजफायर का सम्मान करने की उम्मीद करता है।
अमेरिका की सख्त शर्तें बनीं विवाद की वजह
बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान के सामने कई कड़ी शर्तें रखीं। इनमें सबसे अहम मांग थी कि ईरान पूरी तरह से यूरेनियम संवर्धन बंद करे और ‘जीरो एनरिचमेंट’ नीति अपनाए।
इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से अपने पास मौजूद लगभग 900 पाउंड यूरेनियम भंडार को देश से बाहर करने की भी मांग रखी। इन शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन सकी, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर नियंत्रण का मुद्दा
अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की सुरक्षा का नियंत्रण अपने पास रखना चाहता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस पर नियंत्रण को लेकर विवाद और गहरा गया।
सीजफायर पर संकट के संकेत
करीब 40 दिन बाद लागू हुए सीजफायर के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह संघर्षविराम ज्यादा समय तक टिक पाना मुश्किल हो सकता है।
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