होर्मुज जलडमरूमध्य (Where) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान (Who) के बीच सीजफायर (What) को अगले दो हफ्तों तक बढ़ाने की संभावना (When) जताई जा रही है। यह संकेत तब मिले जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Who) का रुख कुछ नरम दिखा और मध्यस्थों की कोशिशें तेज हुईं (Why)। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश जल्द बातचीत (How) कर सकते हैं जिससे क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?
होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक हलचल के बाद हालात में नरमी के संकेत मिले हैं। न्यूज एजेंसी ‘एपी’ के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीजफायर बढ़ाने पर सहमति बन सकती है और बातचीत की दिशा में प्रगति हो रही है।
किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा वार्ता होती है, तो ये तीन बड़े मुद्दे एजेंडे में शामिल रहेंगे:
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम
- होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और आवाजाही
- युद्ध और नुकसान को लेकर मुआवजा
ट्रंप के बयान से बदले संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होने के करीब है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर अमेरिका पीछे हटे तो ईरान को दोबारा खड़े होने में दशकों लग सकते हैं।
यह बयान उस वक्त आया जब ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने दावा किया कि होर्मुज क्षेत्र में ईरान के समुद्री ट्रैफिक को सफलतापूर्वक रोका गया।
चीन और ईरान पर ट्रंप का रुख
ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पत्र लिखकर ईरान को हथियार न देने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, चीन ने जवाब में भरोसा दिलाया कि वह ऐसा नहीं कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हैं, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।
क्या कम होगा मिडिल ईस्ट का तनाव?
ताजा घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो सकता है। अगर सीजफायर बढ़ता है और बातचीत आगे बढ़ती है, तो मिडिल ईस्ट में स्थिरता की उम्मीद बढ़ेगी।
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