भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल इन दिनों रूस के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव सरगेई शोइगू से मुलाकात की। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और पहलगाम हमले समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। इस मुलाकात को शुरुआत में नियमित कूटनीतिक संवाद के तौर पर देखा गया, लेकिन बाद में सामने आई कुछ रिपोर्टों ने इस बैठक को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
रूस-अफगानिस्तान रक्षा सहयोग को लेकर बढ़ी हलचल
बैठक के बाद रूस और अफगानिस्तान के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े एक महत्वपूर्ण समझौते की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों ने सुरक्षा एवं रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। बताया जा रहा है कि इस सहयोग के तहत रूस अफगानिस्तान को रक्षा उपकरण, आधुनिक सुरक्षा तकनीक और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, समझौते के सभी आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर नजर
रूस और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की सुरक्षा राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और सुरक्षा रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा तथा सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में रूस की बढ़ती भूमिका को कई देश करीब से देख रहे हैं।
पाकिस्तान और अमेरिका में भी चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के रणनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अफगानिस्तान में रूस की बढ़ती सक्रियता क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे सकती है। हालांकि, इन दावों और संभावित प्रभावों को लेकर विभिन्न देशों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत-रूस संबंधों पर भी बनी हुई है नजर
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत रहे हैं। अजीत डोभाल और रूसी अधिकारियों के बीच हाल के महीनों में हुई कई उच्चस्तरीय बैठकों को दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत, रूस और क्षेत्रीय देशों के बीच हो रही कूटनीतिक गतिविधियां भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों को प्रभावित कर सकती हैं।
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