व्हाट्सएप पर आया एक मैसेज और मिनटों में लग गया करोड़ों का चूना, जी, हां देश में बढ़ते साइबर अपराध के मामलों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री I. K. Gujral के बेटे और पूर्व सांसद Naresh Gujral से जुड़ा बड़ा ऑनलाइन फ्रॉड सामने आया है। साइबर ठगों ने उनकी पहचान का दुरुपयोग करते हुए करीब 7.8 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। मामले की जानकारी मिलते ही दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है।
व्हाट्सएप मैसेज से रची गई ठगी की साजिश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने नरेश गुजराल की तस्वीर लगाकर व्हाट्सएप पर उनके एक कर्मचारी से संपर्क किया। ठग ने खुद को नरेश गुजराल बताते हुए कहा कि वह एक जरूरी बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल आरटीजीएस (RTGS) के जरिए पैसे ट्रांसफर करने की जरूरत है।
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मैसेज और प्रोफाइल देखने के बाद कर्मचारी को बातचीत वास्तविक लगी। इसके बाद उसने निर्देशों के अनुसार अलग-अलग किस्तों में बड़ी रकम बताए गए बैंक खातों में भेज दी।
शुरुआती जांच में 7.8 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस साइबर फ्रॉड में करीब 7.8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पीड़ित पक्ष ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
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दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंकों के साथ समन्वय बनाया और लगभग 4 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज़ कराने में सफलता हासिल की। मामले में मंगलवार को ई-एफआईआर दर्ज की गई और जांच लगातार जारी है।
साइबर नेटवर्क और बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी किस साइबर नेटवर्क से जुड़े हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल कैसे बनाई गई और रकम किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
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अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर नकली दस्तावेज, फर्जी बैंक खाते और कई स्तरों पर धन हस्तांतरण की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए जरूर सत्यापित करें। केवल व्हाट्सएप मैसेज या डिस्प्ले फोटो के आधार पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
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विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि साइबर ठगी होने की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम को फ्रीज़ कराने और वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।
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