भारत में सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल की घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए अनुपालन दिशा-निर्देश लागू किए हैं। Instagram, X (पहले Twitter) और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स को संवेदनशील और गंभीर कंटेंट पर अब पहले से कहीं कम समय में कार्रवाई करनी होगी।
अब सिर्फ 2 घंटे में होगा एक्शन
नए नियमों के मुताबिक, संवेदनशील या गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को हटाने के लिए प्लेटफॉर्म्स को अब 120 मिनट यानी 2 घंटे का समय मिलेगा। इससे ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी वीडियो और निजी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की उम्मीद है।
इन मामलों में तुरंत हटाना होगा कंटेंट
नई गाइडलाइन में निजी फोटो या वीडियो को बिना अनुमति साझा करने, किसी को बदनाम करने या गलत जानकारी फैलाने के लिए बनाए गए AI डीपफेक वीडियो, बदली हुई आवाज या चेहरे जैसे कंटेंट को शामिल किया गया है। अदालत के आदेश या सरकार की ओर से अवैध घोषित कंटेंट को हटाने की समय-सीमा भी 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है।
AI कंटेंट पर डिस्क्लेमर और मेटाडेटा जरूरी
AI की मदद से तैयार फोटो, वीडियो, ऑडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट अपलोड करते समय स्पष्ट बताना होगा कि वह AI से बनाया गया है। उचित डिस्क्लेमर और जरूरी मेटाडेटा भी देना होगा। जानकारी छिपाने पर प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट की पहचान कर वॉटरमार्क लगा सकता है या उसे हटा सकता है। सामान्य फोटो एन्हांसमेंट, कलर करेक्शन और बेसिक एडिटिंग इसके दायरे में नहीं आएंगे।
बड़ी टेक कंपनियों पर बढ़ेगा कानूनी दबाव
नियमों का पालन आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा से जुड़ा है। तय समय में कार्रवाई न करने पर प्लेटफॉर्म यह सुरक्षा गंवा सकते हैं और संबंधित प्लेटफॉर्म व अधिकारियों पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
इन नियमों से फर्जी खबरों, डीपफेक और गलत जानकारी पर तेजी से कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, कम समय में AI आधारित मॉडरेशन के कारण व्यंग्य, समाचार रिपोर्टिंग या वैध पोस्ट भी गलती से हटाए जाने की चुनौती बनी रहेगी।
यह भी पढ़ें- Anushka ने प्यूमा पर लगाया बिना परमिशन फोटो इस्तेमाल करने का आरोप
हमारे फ़ैज़ी वेबसाइट से जुड़ने के लिए क्लिक करें
