दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद मकान मालिक की कानूनी जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रेंट एग्रीमेंट में हादसे की जिम्मेदारी से बचने वाली शर्त क्या वास्तव में मकान मालिक को कानूनी दायित्व से मुक्त कर सकती है, जानिए क्या कहते हैं किराएदारी से जुड़े नियम।
रेंट एग्रीमेंट में क्या-क्या जानकारी होती है?
एक स्टैंडर्ड रेंट एग्रीमेंट की शुरुआत मकान मालिक, किराएदार और किराए पर दी जाने वाली प्रॉपर्टी की जानकारी से होती है। इसमें आमतौर पर दोनों पक्षों के नाम-पते, पहचान और प्रॉपर्टी से जुड़ी अन्य जानकारियां दर्ज होती हैं। महीने का किराया और भुगतान की समय सीमा भी स्पष्ट की जाती है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट और उसे प्रॉपर्टी खाली करने के बाद वापस करने की शर्तों का भी उल्लेख होता है। किराएदारी की अवधि भी एग्रीमेंट में दर्ज की जाती है। भारत में रेंट एग्रीमेंट आमतौर पर 11 महीने के लिए बनाए जाते हैं, हालांकि समय और रजिस्ट्रेशन की जरूरतें परिस्थितियों तथा लागू राज्य कानून के अनुसार अलग हो सकती हैं।
किराए में बढ़ोतरी और नोटिस पीरियड
एग्रीमेंट में किराए में बढ़ोतरी से संबंधित क्लॉज हो सकता है। इसमें बताया जाता है कि किराया कब और कितना बढ़ाया जा सकता है। नोटिस पीरियड भी तय किया जाता है, जिसके तहत किराएदारी खत्म करने से पहले मकान मालिक या किराएदार को आमतौर पर निर्धारित अवधि पहले सूचना देनी होती है।
यूटिलिटी और मरम्मत का खर्च
बिजली, पानी, इंटरनेट और मेंटेनेंस चार्ज की जिम्मेदारी एग्रीमेंट में स्पष्ट की जा सकती है। बड़ी स्ट्रक्चरल समस्या, सीपेज या पाइपलाइन की बड़ी दिक्कतें मकान मालिक की जिम्मेदारियों में आ सकती हैं, जबकि रोजमर्रा की छोटी-मोटी मरम्मत किराएदार की जिम्मेदारी हो सकती है।
क्या एग्रीमेंट से मकान मालिक जिम्मेदारी से बच सकता है?
सिर्फ एग्रीमेंट में कोई शर्त लिख देने से मकान मालिक की कानूनी जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं हो जाती। यदि कोई प्रॉपर्टी खतरनाक या बनावट के लिहाज से असुरक्षित है, तो केवल यह लिख देने से कि मकान मालिक किसी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं होगा, वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। यदि बिल्डिंग की बनावट में गंभीर कमी है, वह खतरनाक स्थिति में है और जिम्मेदार व्यक्ति आवश्यक कदम नहीं उठाता, तो कांट्रैक्ट की शर्तें लागू कानूनी कर्तव्यों से ऊपर नहीं हो सकतीं।
जरूरी सेवाएं मनमाने ढंग से बंद नहीं की जा सकतीं
किराएदारी से जुड़े कानून और नियम जरूरी सेवाओं के मामले में भी सुरक्षा देते हैं। मकान मालिक आमतौर पर किराएदारी एग्रीमेंट के जरिए बिजली जैसी जरूरी सेवाएं मनमाने ढंग से बंद नहीं कर सकता। इसलिए ऐसी शर्त, जो जरूरी सेवा काटने का बेरोकटोक अधिकार देती है, लागू कानून के खिलाफ होने पर लागू नहीं हो सकती।
गैरकानूनी गतिविधियों में जिम्मेदारी
किराएदार अपने गैरकानूनी कामों के लिए खुद जिम्मेदार होता है। हालांकि मकान मालिक केवल यह कहकर हर कानूनी नतीजे से नहीं बच सकता कि प्रॉपर्टी पर होने वाली हर गतिविधि के लिए सिर्फ किराएदार जिम्मेदार है। यदि मकान मालिक जानबूझकर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होता है, उन्हें बढ़ावा देता है या ऐसी स्थिति को नजरअंदाज करता है जिससे कानूनी जिम्मेदारी बनती है, तो एग्रीमेंट उसे स्वतः सुरक्षा नहीं देता।
इन प्वाइंट में समझें पूरी खबर
- दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई है।
- घटना के बाद पांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
- पुलिस ने इमारत के मालिक और परिवार के दूसरे सदस्यों को हिरासत में लिया है।
- सामने आए पीजी बिल्डिंग के रेंट एग्रीमेंट में जिम्मेदारी से जुड़ा एक क्लॉज है।
- इस क्लॉज में हादसे, अनहोनी या जोखिम के लिए मकान मालिक या पीजी अथॉरिटी को जिम्मेदार नहीं बताया गया है।
- रेंट एग्रीमेंट में मकान मालिक, किराएदार और प्रॉपर्टी से जुड़ी जानकारी होती है।
- इसमें किराया, भुगतान की समय सीमा, सिक्योरिटी डिपॉजिट और किराएदारी की अवधि जैसी शर्तें शामिल होती हैं।
- एग्रीमेंट में किराए में बढ़ोतरी और नोटिस पीरियड का प्रावधान भी हो सकता है।
- बिजली, पानी, इंटरनेट और मरम्मत के खर्च की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
- केवल एग्रीमेंट में जिम्मेदारी से बचने की शर्त लिख देने से मकान मालिक की कानूनी जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं होती।
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