12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 की भीषण दुर्घटना के बाद, एयर इंडिया ने अपने ड्रीमलाइनर बेड़े की 66 उड़ानें रद्द कर दी हैं। इस हादसे में 241 यात्रियों समेत 30 से अधिक लोग मारे गए थे। इस घटना के बाद विमानन नियामक DGCA ने एयर इंडिया को सख्त जांच के निर्देश दिए हैं।
जांच के चलते उड़ानों पर असर
DGCA के अनुसार, एयर इंडिया के कुल 33 ड्रीमलाइनर में से 24 विमानों की जांच हो चुकी है, और शेष विमानों की जांच प्रक्रियाधीन है। इनमें से कुछ विमान ‘एओजी’ (Aircraft on Ground) श्रेणी में आते हैं यानी फिलहाल सेवा से बाहर हैं। एयर इंडिया ने पुष्टि की कि नियामक जांच और सुरक्षा कारणों के चलते उड़ानों को रद्द करना पड़ा है।
प्रभावित मार्ग और तकनीकी कारण
मंगलवार को रद्द की गई फ्लाइट्स में अहमदाबाद-लंदन की AI-159, दिल्ली-पेरिस की AI-143 और सैन फ्रांसिस्को-मुंबई की AI-180 शामिल हैं। इनमें से कई उड़ानें सुरक्षा जांच या जेट की अनुपलब्धता के कारण रद्द हुईं। साथ ही, कुछ फ्लाइट्स को पाकिस्तान और ईरान के हवाई क्षेत्र के बंद होने की वजह से रोका गया है।
मौसम और तकनीकी समस्याओं की मार
दिल्ली-दुबई (AI-915), बेंगलुरु-लंदन (AI-133), दिल्ली-वियना (AI-153) जैसी प्रमुख उड़ानें तकनीकी कारणों से रद्द की गईं, वहीं दिल्ली-इंदौर, दिल्ली-हैदराबाद और अन्य घरेलू मार्गों की फ्लाइट्स मौसम के चलते स्थगित की गईं।
सुरक्षा सर्वोपरि: विशेषज्ञों की राय
विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ मोहन रंगनाथन का कहना है, “एक ड्रीमलाइनर के खो जाने के बाद सभी विमानों की जांच करना आवश्यक है। इसके साथ ही हवाई क्षेत्र की सीमाएं और क्रू ड्यूटी समय भी बड़ी चुनौतियां हैं, जिनका सीधा असर एयर इंडिया के पूरे नेटवर्क पर पड़ा है।” Air India के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है। सुरक्षा जांचों और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र की बंदिशों के बीच, एयरलाइन को तकनीकी और परिचालन दोनों स्तरों पर बड़ी रणनीतिक योजनाओं की आवश्यकता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सेवा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
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