Saturday, December 6, 2025
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बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद : सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले सुरक्षा सख्त

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट अपना अहम फैसला सुना सकता है। संभावित तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारी फोर्स तैनात की गई है।


ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी तेज

बनभूलपुरा इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 12 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम में लगातार निगरानी की जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस टीम को दी जाएगी। साथ ही ड्रोन भी पूरे इलाके में उड़ान भरकर हालात पर नजर रख रहे हैं।

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ट्रैफिक डायवर्जन लागू, कई रूट बदले गए

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले शहर में ट्रैफिक को कई रूटों पर डायवर्ट किया गया है।

  • रामपुर/रुद्रपुर से आने वाले वाहन पंतनगर तिराहा से नया बाइपास होते हुए आगे भेजे जा रहे हैं।
  • बरेली/किच्छा रोड से आने वाले वाहन सीधे सितारगंज के रास्ते खटीमा भेजे जाएंगे।
  • काशीपुर/बाजपुर और पर्वतीय जिलों से आने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

किसी भी वाहन को नगला तिराहा या चोरगलिया से नैनीताल या जिला सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।


29 एकड़ रेलवे भूमि पर अतिक्रमण का दावा

रेलवे का कहना है कि बनभूलपुरा क्षेत्र में लगभग 29 एकड़ भूमि पर अवैध अतिक्रमण है, जहां करीब 5,000 परिवार यानी लगभग 50,000 लोग वर्षों से रह रहे हैं। हाईकोर्ट के 2022 के आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और आज अंतिम फैसला आने की संभावना है।


पुलिस का फ्लैग मार्च और गिरफ्तारियाँ

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च किया। हिंसा में शामिल 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 121 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और कोर्ट के फैसले का सम्मान करें।


रेलवे और पैरामिलिट्री भी अलर्ट पर

रेलवे स्टेशन और पटरी क्षेत्रों में भी अतिरिक्त सुरक्षा तैनात कर दी गई है। नैनीताल पुलिस ने आईटीबीपी और एसएसबी को भी रिज़र्व में रखा है। क्षेत्र को चार सेक्टरों में बाँटकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।


क्या है पूरा मामला?

2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लगभग 30 हेक्टेयर रेलवे भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया था। प्रभावित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। आज इस मामले में अंतिम फैसला आ सकता है, जिसके चलते प्रशासन किसी भी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारियों में जुटा है।


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