बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ आया है। जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके साथ ही लगभग दो दशक लंबे उनके शासनकाल का समापन हो गया। इस फैसले के बाद अब राज्य की राजनीति में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा, नई सरकार की राह साफ
नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल सैयद अता हसनैन को लोक भवन में सौंपा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एनडीए गठबंधन को विधानसभा चुनाव में बड़ी सफलता मिली थी। माना जा रहा है कि अब बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो सकता है।
कैबिनेट बैठक के बाद लिया बड़ा फैसला
इस्तीफे से पहले नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक के बाद ही उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया, जिससे सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। उनके इस कदम को राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
विकास कार्यों का दिया हवाला
इस्तीफे के बाद अपने बयान में नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय काम किया। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण पर जोर देने की बात कही।
‘7 निश्चय-3’ योजना से आगे बढ़ेगा बिहार
नीतीश कुमार ने बताया कि 2025 से 2030 तक के लिए ‘7 निश्चय-3’ विजन तैयार किया गया है, जो राज्य के विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहयोग बिहार के विकास में महत्वपूर्ण रहा है।
नई सरकार को देंगे पूरा सहयोग
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नई सरकार को उनका पूरा समर्थन और मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार विकास की राह पर आगे बढ़ता रहेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बनाएगा।
अब किसके हाथ में होगी कमान?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा हो रही है, लेकिन अंतिम फैसला एनडीए नेतृत्व पर निर्भर करेगा।
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