कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘एमजीएनआरईगा बचाओ संग्राम’ के तहत केंद्र सरकार के VB-G राम जी अधिनियम, 2025 के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा, सांसद जयराम रमेश और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
प्रदर्शन का उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लाए गए विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम का विरोध करना था। कांग्रेस का आरोप है कि नया कानून मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करता है।
“मजदूरों की आवाज दबाई जा रही है”
पवन खेड़ा ने कहा कि जो सरकार मजदूरों और किसानों का अपमान करती है, वह ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं टिकती। उन्होंने बताया कि देशभर की राज्य राजधानियों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। खेड़ा ने कहा,
“एनआरईजीए को बचाना मजदूरों की आवाज को बचाना है।”
पुलिस रोक पर कांग्रेस का आरोप
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर कांग्रेस नेताओं को आगे बढ़ने से रोका गया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी दबाव से कांग्रेस के संकल्प को नहीं तोड़ सकती।
केरल से भी उठा विरोध
केरल में एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर नागरिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नए कानून के जरिए रोजगार का अधिकार छीना गया है और सूचना का अधिकार भी निष्प्रभावी किया जा रहा है।
गांधी नाम हटाने पर नाराज़गी
कांग्रेस का कहना है कि नए कानून में महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी ने केंद्र-राज्य के बीच 60:40 फंडिंग पैटर्न पर भी आपत्ति जताई, जबकि रोजगार गारंटी योजना पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का प्रावधान किया है, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि इससे मूल अधिकारों की भरपाई नहीं होती।
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