भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उत्तर प्रदेश इकाई के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह ऐलान रविवार, 14 दिसंबर 2025, को लखनऊ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में किया गया। पंकज चौधरी निर्विरोध चुने गए, क्योंकि नामांकन प्रक्रिया के दौरान 13 दिसंबर को केवल उनका ही नामांकन पत्र दाखिल हुआ था।
निर्विरोध चयन से साफ हुआ पार्टी नेतृत्व का भरोसा
बीजेपी नेतृत्व का पंकज चौधरी पर भरोसा उनके निर्विरोध चुने जाने से साफ झलकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है, खासकर ऐसे समय में जब आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।
सात बार सांसद और अनुभवी नेता हैं पंकज चौधरी
पंकज चौधरी महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से सात बार सांसद रह चुके हैं। वह कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अंतर्गत आता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुर्मी समाज का खासा प्रभाव माना जाता है। पंकज चौधरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता है।
ओबीसी समीकरण साधने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि पंकज चौधरी की नियुक्ति के पीछे बीजेपी की ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में कुर्मी समुदाय का झुकाव समाजवादी पार्टी की ओर देखा गया था। ऐसे में बीजेपी इस वर्ग को फिर से अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।
नगर निगम से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
पंकज चौधरी का राजनीतिक करियर स्थानीय राजनीति से शुरू हुआ। उन्होंने 1989 से 1991 तक गोरखपुर नगर निगम में सदस्य के रूप में काम किया। इस दौरान वह एक वर्ष तक डिप्टी मेयर भी रहे। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ और संगठनात्मक अनुभव के चलते उन्होंने धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की भूमिका आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सियासत में अहम मानी जा रही है।
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