Tuesday, January 18, 2022
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लगातार कमजोर होती कांग्रेस, Uttarakhand समेत इन राज्यो में कैसे होगी नैया पार

खबर संसार, देहरादून : लगातार कमजोर होती कांग्रेस, Uttarakhand समेत इन राज्यो में कैसे होगी नैया पार , आजादी के बाद सबसे लंबे समय तक देश की बागडोर संभालने वाली कांग्रेस पार्टी लगातार कमजोर हो रही है, अपना आस्तिव बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। लेकिन विंडंबना ये है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ व दिग्गज नेता पार्टी छोड़ दी, और कई नेताओं ने बागी तेवर अपना रखे हैं। आने वाले वर्ष 2022 में Uttarakhand, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। तो ऐसे में सवाल ये हैं कि कांग्रेस पार्टी भाजपा से मुकाबला कैसे कर पाएगी।

Uttarakhand में हरीश रावत व प्रीतम सिंह मे रस्साकशी जारी

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व सूबे में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख प्रीतम सिंह के आपस में विचार मेल नहीं खाते। तो इससे पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन Uttarakhand एक ऐसा पहला राज्य है जहां पर भाजपा के नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी में मंत्री रहे यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे संजीव आर्य ने कांग्रेस हाथ थाम लिया है। यहां बता दे कि वह 2017 के विस चुनाव में कांग्रेस छोड़कर वह भाजपा में शामिल हुए थे।

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भाजपा से कांग्रेस पार्टी में आये नवजोत सिंह सिद्धू और गांधी परिवार के वफादार रहे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के बीच ऐसा टकराव पैदा हुआ कि कैप्टन को पद छोड़कर पार्टी से अलग होना पड़ा। पंजाब में दशकों से कांग्रेस का चेहरा रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने सियासी करियर के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते-पहुंचते पार्टी को अलविदा कह दिया।

सेक्युलरिज्म व सॉफ्ट हिंदुत्व के बीच झूलती कांग्रेस

पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा काग्रेंस की खोई जमीन तलाशने की कोशिश में दिन-रात एक किये हुए हैं, लेकिन पार्टी से नेताओं का जाना जारी है। कांग्रेस पार्टी पर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी का सबसे भारी संकट ये है कि वह अपना नेतृत्व तय नहीं कर पा रही है और लगातार दिशाहीन होती जा रही है।

राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष पद से हटे जरूर हैं, लेकिन उनकी दखलंदाजी लगातार जारी है। कांग्रेस इन दिनों ठोस सेक्युलरिज्म और सॉफ्ट हिंदुत्व के बीच झूल नजर आ रह है। सियासी तूफान में फंसे कांग्रेस के जहाज को अब ऐसे कप्तान की जरूरत है जो बाहरी झंझावतों के अलावा अंदरूनी भीतरघात से भी पार्टी को बचा सके।

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