हल्द्वानी खबर संसार: Corona curfew के चलते जहां कल तक बाजारों और सड़कों पर बेतहासा भीड़ नजर आती थी आज न कहीं शोर है और न कहीं सड़क पर दौड़ती गाड़ियां नजर आ रही हैं। बीते वर्ष मार्च माह 2020 की तरह चारो और सन्नाटा और सिर्फ सन्नाटा ही नजर आ रहा है।
सड़के वीरान सी पड़ी हुई हैं, लोगों का हुजूम नजर नहीं आ रहा हैं। Corona curfew के दौरान बाजारों में सन्नाटा छाया रहा। कोरोना की दूसरी लहर ने एक बार फिर कफ्र्यू के हालात पैदा कर दिये हैं।
कोरोना संक्रमण जो कि मानवता का अदृश्य दुश्मन है। जिसने अब तक कई बेगुनाहों की जान ले ली है। इसके बावजूद शासन से लेकर आमजनों तक जिधर देखों-लापरवाही ही लापरवाही करता नजर आया। जिसके चलते एक दिन का साप्ताहिक Corona curfew लगाया गया।
यह भी पढ़ें- हल्द्वानी – Nude होकर लड़कियां फंसा रहीं अपना शिकार
मतलाब साफ है कि यथा राजा तथा प्रजा। कोरोना से पहली लड़ाई में यह तो साफ हो गया है कि हमारी हार हुई है। अब देखना होगा कि जब कोरोना पहले से ज्यादा खतरनाक स्वरुप में हमारे सामने है तब मुकाबला कैसे किया जाएगा?
24 घंटे में 2,61,500 नए मामले
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आज जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 2,61,500 नए मामले सामने आए और 1500 से ज्यादा की मौत हो गई। 1 दिन में 1,38,423 स्वस्थ होकर घर लौटे। अब तक कुल 1,47,88,109 संक्रमित हो चुके हैं, 18,01,316 एक्टिव मामले हैं, 1,28,09,643 रिकवर होकर घर जा चुके हैं जबकि 1,77,150 लोगों की मौत हो गई। जिसके चलते एक दिन का साप्ताहिक Corona curfew लगाया गया।
तो क्या फिर लगेगा लॉकडाउन
जिस तरह से देश में महामारी ने खतरनाक रूप धारण कर रखा है, इससे तो यही लगता है कि लॉकडाउन ही एकमात्र सहारा है-जिससे कोरोना के चेन को तोड़ने का बड़ा हथियार कहा जा सकता है। मतलब साफ है कि पीएम मोदी ने उस समय दूरदर्शिता से लॉकडाउन लगाने का सही फैसला किया था। इस पर बहस तेज हो सकती है। विपक्षी दलों को भी आइना में झांकना चाहिये जो लॉकडाउन को लेकर पीएम को कटघरे में खड़े करते नजर आते थे। वे आज दबे स्वर में वीकेंड Corona curfew लगाने के लिये व्याकुल है।
मास्क और नियमों की अनदेखी न करें
दरअसल कहीं न कहीं कोरोना वायरस के कमजोर मान लेने की भूल के बाद जिस तरह से मास्क नहीं पहनने और सामाजिक दूरी का सरासर उल्लंघन हुआ-उसी का कहीं न कहीं नतीजा है यदि वीकेंड लॉकडाउन के वाबजूद संक्रमितों की संख्या नहीं थमी तो फिर क्या होगा? क्या फिर से लॉकडाउन के दौर में लौटना पड़ेगा? यह तमाम सवाल है। जिसका जवाब अभी आना बाकी है।


