खबर संसार, रुद्रप्रयाग : इस मान्यता के चलते, उत्तराखंड के इन three गांवों में कभी नहीं मनाई जाती होली , इन दिनों उत्तराखंड में अबीर-गुलाल के साथ होल्यार गांव व शहरों में खूब नाच गा रहे हैं। बच्चे बूढ़े महिलाएं सभी रंगों के इस उत्सव में भागीदार हो रहे हैं। हर ओर सभी होली के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। लेकिन उत्तराखंड में three ऐसे गांव है जहां पर होली मनाना वर्जित हैं। इन गांवों के लिए कभी होली नहीं खेलते। अगर लोगों ने कभी होली खेलने की कोशिश भी की तो हैजा जैसी बीमारियों ने जमकर तांडव मचाया साथ कई लोगो की मौत भी हो गई। इसलिए इन तीन गांवों के लिए कभी नहीं मनाते होली।
ये भी पढें- ‘बेबी डॉल’ सिंगर Kanika Kapoor दोबारा फिर करने जा रहीं शादी
इन three गांवो में 372 सालों ने उड़ा अबीर-गुलाल
बता दें कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर अगस्त्यमुनि ब्लाॅक की तल्लानागपुर पट्टी का क्वीली, कुरझण व जौंदला गांव के लोगोें के लिए रंगों का उत्सव कोसों दूर है। इन three गांवों में 372 सालों से नहीं उड़ा अबीर-गुलाल यहां न कोई होल्यार आता है, और न ही ग्रामीण एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। 350 साल पहले जब इन गांवों का बसाव हुआ तो कुछ लोगों ने होली खेलने का प्रयास किया, लेकिन तब कई लोग हैजा बीमारी की चपेट में आ गए जिसमें कई लोगों को जान गंवानी पड़ी। तब से यहां होली नहीं खेली गई।
कुलदेवी को नहीं पसंद होली का हुड़दंग
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी कुलदेवी और ईष्टदेव भेल देव को होली का हुड़दंग और रंग पसंद नहीं है, इसलिए वे सदियों से होली का त्योहार नहीं मनाते हैं। ग्रामीण चन्द्रशेखर पुरोहित ने बताया कि कई सालों पहले जब गांव में होली खेली गई तो हैजा (उल्टी-दस्त) जैसी बीमारी के कारण लोगों की मौत होने लगी। इसके बाद कष्ट के निवारण को लेकर ग्रामीणों ने काफी प्रयास किये, इसके बाद कई वर्ष बीत जाने के बाद भी होली नहीं खेली गई, लेकिन दूसरी बार फिर किसी ग्रामीण ने होली खेली तो घटना की पुनरावृत्ति हो गई। लोग काल कलवित हो गए। इसके बाद तो लोगों के मन में भय सा बन गया और ग्रामीणों ने आज तक होली नहीं खेली।


