हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा के बाद फाल्गुन माह की शुरुआत होती है। यह महीना वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी माह में महाशिवरात्रि और होली जैसे बड़े पर्व आते हैं। साथ ही विजय एकादशी, आमलकी एकादशी, यशोदा जयंती और जानकी जयंती जैसे व्रत-उत्सव भी मनाए जाते हैं।
शिव पूजा से मिलती है मानसिक शांति
फाल्गुन माह में भगवान शिव की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है। शिवलिंग पर जल और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का नियमित जाप मानसिक स्थिरता और शांति प्रदान करता है। वसंत ऋतु में शिव आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कृष्ण भक्ति से वैवाहिक सुख
यह महीना राधा-कृष्ण की आराधना के लिए भी खास है। गुलाल अर्पित कर फाल्गुनी भजन गाने से दांपत्य जीवन में प्रेम और समृद्धि बढ़ती है। संतान की इच्छा रखने वाले भक्त बाल कृष्ण की पूजा करें, जबकि प्रेम और सुख की कामना करने वालों को युवा कृष्ण का ध्यान करना चाहिए।
चंद्र पूजा से भावनात्मक संतुलन
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है। फाल्गुन में प्रतिदिन दूध से चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव कम होता है और कुंडली में चंद्र की स्थिति मजबूत होती है। इस माह में घी, सरसों का तेल, मौसमी फल, अनाज और वस्त्रों का दान शुभ माना गया है। यह पुण्य और सकारात्मक फल देने वाला माना जाता है।
होलाष्टक में रखें ये सावधानी
- विवाह और सगाई से परहेज करें – होलाष्टक के आठ दिनों में शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य अशुभ माने जाते हैं।
- गृहप्रवेश न करें – नए घर में प्रवेश या शुभ मुहूर्त वाले कार्यक्रम टाल देना बेहतर माना जाता है।
- नया व्यवसाय शुरू न करें – नई दुकान, कंपनी या बड़े निवेश की शुरुआत इस अवधि में नहीं करनी चाहिए।
- भूमि-पूजन और निर्माण कार्य स्थगित रखें – जमीन खरीदना या निर्माण शुरू करना शुभ नहीं माना जाता।
- शुभ संस्कारों से बचें – मुंडन, नामकरण, उपनयन जैसे संस्कार भी टालने की सलाह दी जाती है।
- विवाद और क्रोध से दूर रहें – इस समय मानसिक संयम रखना जरूरी है, क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।
- तामसिक भोजन का त्याग करें – मांस, मछली, शराब और नशीले पदार्थों से दूरी बनाना शुभ माना गया है।
- नियमित पूजा-पाठ करें – भगवान विष्णु और श्रीहरि की उपासना करने से नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
- दान-पुण्य करें – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से सकारात्मक फल मिलते हैं।
- होली तक धैर्य रखें – होलाष्टक समाप्त होने के बाद ही मांगलिक और शुभ कार्य करना उत्तम माना जाता है।
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