उधम सिंह नगर के हरिपुरा जलाशय क्षेत्र में सिंचाई विभाग की सरकारी भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण के मामले ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने विस्तृत सर्वे कराया, जिसमें अवैध कब्जे और धार्मिक संरचनाओं के अनधिकृत निर्माण की पुष्टि की गई।
मामला तब सामने आया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को क्षेत्र की भूमि पर तेजी से बढ़ रहे अतिक्रमण और जनसांख्यिकीय बदलावों की आशंकाओं से अवगत कराया गया। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी को तत्काल सर्वे और सत्यापन की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए।
डीएम नितिन भदौरिया के आदेश पर अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा तथा ऋचा सिंह की अगुवाई में की गई जांच में पाया गया कि सरकारी भूमि के हिस्से पर रहवास बढ़ाने और धार्मिक संरचनाओं के निर्माण के प्रयास किए जा रहे थे। सर्वे दल ने तीन अवैध मज़ारों और एक मस्जिदनुमा ढांचे का भी उल्लेख किया है।
कुल 60 नोटिस जारी किए गए
प्रशासन ने बुधवार को कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए कुल 60 नोटिस जारी किए, जिनमें चार नोटिस अवैध धार्मिक निर्माणों से संबंधित हैं। एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि नोटिस की 15 दिन की अवधि पूरी होने पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीमें मौजूद रहेंगी।
अधिकारियों ने बताया कि हरिपुरा जलाशय क्षेत्र में पहले चरण में लगभग 1.13 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण में 2.45 हेक्टेयर से अधिक भूमि को चिन्हित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिलता है कि बाहरी राज्यों से आए कुछ समूहों ने यहां अनधिकृत निर्माण कर बसावट शुरू की थी।
मुख्यमंत्री धामी ने इस पर कहा कि सीमा से लगे जिलों में आबादी असंतुलन की आशंकाओं पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना सरकार की प्राथमिकता है और इस प्रकार के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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